क्या लाल ग्रह मंगल पर नहीं है जीवन?

 

एबीएन डेस्क। मंगल ग्रह पर जीवन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए एक निराशाजनक खबर है। वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि जिन जीवाश्म (फॉसिल) साक्ष्यों को उस ग्रह पर जीवन का संकेत समझा गया है, वे भ्रामक हो सकते हैं। धरती से कई रोबोट संचालित यान मंगल ग्रह पर भेजे गए हैं। उन्हें वहां जीवन के संकेत का पता लगाने के मकसद से भेजा गया है। आम तौर पर मंगल ग्रह की सतह शुष्क है। लेकिन उस पर कुछ सूक्ष्म माइक्रोफॉसिल नजर आए हैं, जिन्हें कुछ वैज्ञानिकों ने इस ग्रह पर अतीत या वर्तमान में जीव मौजूद होने का संकेत समझा है। छद्म जीवाश्मों की थ्योरी : लेकिन लंदन से प्रकाशित जर्नल आॅफ जियोलॉजिकल में छपी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में माइक्रोफॉसिल संकेतों की व्याख्या करते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एडिनबरा विवि में एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट सीन मैकमोहन और आॅक्सफोर्ड विवि में जियो-बॉयोलॉजिस्ट जूली कॉस्मिड्स ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट मे कहा है कि वैज्ञानिकों को गैर-जैवीय खनिज पदार्थों पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए। इनमें कई ऐसे होते हैं, जो फॉसिल की तरह नजर आते हैं। इस अध्ययन रिपोर्ट में दर्जनों ऐसे गैर-जैवीय (नॉन बॉयोलॉजिकल) प्रक्रियाओं का जिक्र है, जिनसे छद्म जीवाश्म पैदा होते हैं। यानी वे जीवाश्म जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में वे जीवाश्म नहीं होते। इन शोधकर्ताओं के मुताबिक मंगल ग्रह पर जो जीवाश्म दिखे हैं, उनके साथ भी ऐसी ही बात हो सकती है। वेबसाइट साइंसअलर्ट.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मैकमोहन ने कहा है- आगे चल कर मार्स पर गए घुमंतू यान (रोवर) जरूर ऐसी कोई चीज हासिल करेंगे, जो जीवाश्म की तरह नजर आएंगे। इसलिए हमें उनकी रासायनिक संरचना को समझने के लिए खुद सक्षम बनाना पड़ेगा।

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