टीम एबीएन, कोडरमा। आज ग्रिजली पब्लिक स्कूल, गुमो सतपुलिया में पृथ्वी दिवस (अर्थ डे) के उपलक्ष्य में भाषण प्रतियोगिता करायी गयी। जिसमें बच्चे बढ़-चढ़कर भाग लेकर विश्व पृथ्वी दिवस के ऊपर धरती की हरियाली और पर्यावरण बचाने का संकल्प लिये।
सभी उपस्थित लोगों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये। सातवीं की छात्रा साम्या प्रवीण ने बताया है कि दुनिया आज अर्थ डे मना रही है। धरती पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने तथा दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल के दिन पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत की गयी थी।
1970 में शुरू हुई इस परंपरा को दुनिया ने खुले दिल से अपनाया और आज लगभग पूरी दुनिया में प्रति वर्ष पृथ्वी दिवस के मौके पर धरती को हरा भरा बनाये रखने और हर तरह के जीव-जंतुओं को पृथ्वी पर उनके हिस्से का स्थान और अधिकार देने का संकल्प लिया जाता है।
कक्षा सातवीं की छात्रा मीनल महतो ने धरती को बचाने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा, मानव व अन्य जीवों की रक्षा के लिए सभी संकल्प लेते हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। दूसरों को भी जागरूक करेंगे।
प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाना है और देश को पर्यावरण संकट से बचाना है। लोगों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से अवगत कराते हुए इसका उपयोग न करने के लिए प्रेरित किया।
कक्षा सातवीं की छात्रा अनन्या ने बताया कि
जल बचाओ, कोई इन्हें तेजी से बताओ
अपने अपने कल को बचाओ।
जल बचाओ जीवन बचाओ का यह नारा अब हमारे लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यह तो हम सब जानते है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जल भी वायु के समान ही काफी आवश्यक है लेकिन इस विषय में सबसे चिंता की बात यह है कि पृथ्वी पर स्वच्छ ताजे पानी की मात्रा दिन-प्रतिदिन घटती ही जा रही है।
पानी के कमी के कारण विश्व भर में सूखा, कई तरह की बीमारियां, प्राकृतिक प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही है परन्तु इस विषय की सबसे दुखद बात यह है कि लोग अभी भी जल संरक्षण के महत्व को लेकर पूर्ण रुप से जागरूक नहीं हो रहे हैं।
विद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष श्रीमान काशीनाथ कुमार ने विद्यार्थियों को पृथ्वी दिवस पर बच्चों को जागरूक तथा संकल्प दिलाते हुए बताए हैं कि पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष।
पृथ्वी प्रदूषण का अर्थ है- वायु, जल, मिट्टी, प्लास्टिक का प्रयोग, डस्टबिन का सही उपयोग ना करना आदि का अवांछित द्रव्यों से दूषित होना, जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान द्वारा अन्य अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ते हैं।
वर्तमान समय में पर्यावरणीय का यह एक प्रमुख कारण है। इसे बचाना हम सभी लोगों का कर्तव्य है और इसे बचा कर हम अपना जीवन को सुरक्षित करें और आने वाले पीढ़ी को भी सुरक्षित रखें। अंत में कार्यक्रम की समाप्ति विद्यालय के प्राचार्या महोदया श्रीमती नीरजा ने बताया कि पर्यावरण स्वच्छ है तो हमारा जीवन है। पृथ्वी दिवस की शुरूआत 22 अप्रैल 1970 इस विशेष शुरुआत की गयी।
पर्यावरण को शुद्ध रखें जहां तक हो प्रदूषित होने से हमें बचाव करना चाहिए। साथ ही विद्यालय को भी स्वच्छ रखें। डस्टबिन का प्रयोग करें, जल का बचाव करें, पेड़ लगायें आदि बातों पर ध्यान आकर्षित करते हुए बच्चों एवं शिक्षक शिक्षिकाओं को जागरूक की हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक सकिंदर कुमार, संयोजिका अनीता कुमारी, अर्चना चंदन, पूजा झा, मारिया मंडल शिक्षिका श्वेता अग्रवाल, रश्मि सूद, संजू कुमारी, सोनी गुप्ता, सदफ नाज, गुरजीत कौर, दिशा सोनी, नेहा कुमारी, संगीता कुमारी, मनीषा कुमारी, दिव्याली कुमारी, नेहालाल, प्रियम, बीषा, ईशिका, श्रुति, पूनम तेजपाल, सोनाली कुमारी, अमिषा कुमारी, सीमा पंडित, सुनीता कुमारी, सुप्रिया कुमारी, अंजली सलूजा, नेहा गुप्ता, रितिका पाण्डेय, अंजली कुमारी, डिम्पल, साक्षी, रितिका जैन, रिद्धिमा, रिंकी, ज्योती, शालिनी, मनीमाला दत्ता, साक्षी सावंत, प्रतिमा शर्मा, दीपिका, सूरज कुमार, मुकेश कुमार, प्रतीक जैन, अनिल कुमार यादव, रजनीश कुमार, संजय कुमार एवं सतबीर की भूमिका सराहनीय रही।
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