टीम एबीएन, रांची। रांची में जमीन जालसाजी के कोलकाता कनेक्शन का खुलासा हुआ है। ईडी ने इसकी जांच शुरू कर दी है। बंगला पर्चा का इस्तेमाल जमीनों की हड़पा गया है. फॉरेंसिक जांच में ये चोरी पकड़ी गयी है। दरअसल, भूमाफिया और अंचल कर्मियों के साथ-साथ जमीन से संबंध रखने वाले दूसरे विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से खाली पड़ी जमीनों पर कब्जा किया जाता था। इसमें बेहद कीमती जमीन भी शामिल है।
भूमाफिया और सरकारी कर्मचारियों का गठजोड़ इतना मजबूत है कि उन्होंने सेना की जमीन पर भी कब्जा कर लिया। हालांकि, अब इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए ईडी की एंट्री हो चुकी है। ईडी की जांच के बाद अपनी जमीन गवां चुके कई लोगों की आस जगी है कि शायद अब उनकी कीमती जमीन उन्हें वापस मिल जाये।
ईडी ने अपनी जांच में यह पाया है कि अधिकांश खाली पड़ी या लीज वाली जमीनों को हड़पने के लिए उसके मालिकाना हक को पश्चिम बंगाल दिखाया गया है। इस नेचर की जमीन को बंगला पर्चा वाली जमीन कहा जाता है। सेना की जमीन को हड़पने के लिए भी कोलकाता के ही जाली कागजों का इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान ईडी ने जमीन के मूल कागजात और गिरफ्तार प्रदीप बागची के मूल कागजात की जब फॉरेंसिक जांच कराई तो मूल दस्तावेज में हेराफेरी पकड़ी गयी। इसी तरह चोसायर होम जमीन मामले में भी फर्जी कागजात तैयार कर जमीन हड़पी गयी थी।
सेना की जमीन के साथ-साथ रांची के चोसायर होम स्थित 99 डिसमिल जमीन मामले की जांच भी ईडी कर रही है। यह जमीन उमेश कुमार गोप नाम के व्यक्ति की पुस्तैनी जमीन है, लेकिन करोड़ों रुपए की इस जमीन पर माफिया की नजर पड़ी, जमीन हड़पने के लिए फर्जी कागजात तैयार किये गये और जमीन पर कब्जा कर लिया गया।
जमीन से असली मालिक यानी उमेश कुमार गोप को बेदखल कर दिया गया। उमेश अपनी जमीन के असली कागजात लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी एक न चली। भूमाफिया और अंचल कर्मियों का सिंडिकेट इतना मजबूत था कि उमेश को जान से मारने की धमकियां तक मिलने लगी।
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