एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। तोरपा प्रखंड की फटका पंचायत के गुटुहातू गांव की शशिकांत गुड़िया का नाम अपने गांव-घर को छोड़कर शायद ही किसी को पता था। लेकिन कृषि के क्षेत्र में उसने इतनी मेहनत की और स्वयं सेवी संस्था "प्रदान" से तकनीकी प्रशिक्षण लेकर उसने खेती के क्षेत्र में एक नयी पहचान कायम कर ली।
शशिकांत बताती हैं कि जून 2021 में उन्हें सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के बारे में पता चला, जिसे गांव में आयोजित महिला मंडल और ग्राम संगठन बैठक में प्रदान ने प्रस्तुत किया था। जैसे ही उन्हें इस प्रणाली के बारे में पता चला, वह गांव में गठित सौर उपयोगकर्ता समूह का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हो गयीं और आज वह कारो सोलर सिंचाई समिति की एक सक्रिय सदस्य हैं। इस गांव के लिए सिंचाई के बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी कमी थी। इसके कारण गांव के लोग बरसात को छोड़कर अन्य किसी मौसमों में खेती नहीं कर पाते थे।
खेती के लिए पूरा गांव मॉनसूनी वर्षा पर बारिश पर निर्भर रहते थे। शशिकांत का परिवार खरीफ की फसल के दौरान कुछ जमीन पर केवल धान और मडुआ की खेती करती थी। सिंचाई की कमी के कारण दूसरी फसल के बारे में वह सोच भी नहीं सकती थी। इसक कारण पूरा खेत खाली पड़ी रहती थी। हालांकि शशिकांत की जमीन कारो नदी के तट पर ही थी, पर नदी के पानी को खेतों तक ले जाना गंभीर समस्या थी। गांव में बिजली की स्थिति वैसी ही थी। इसके कारण वह मोटर पंप से भी सिंचाई नहीं कर पाती थी।
डीजल और केरोसिन महंगा होने के कारण खेती में लागत अधिक होती थी। उसी दौरान उसे प्रदान संस्स्था से जानकारी मिली कि सौर लिफ्ट सिंचाई की जानकारी मिली। सौर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली की स्थापना की प्रक्रिया के लिए वह गांव में होनेवाली नियमित बैठकों में भाग लिया और सौर उपयोगकर्ता समूह में अपने हिस्से की राशि का योगदान दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर अपने हिस्से का योगदान दिया और दूसरों को भी शामिल होने और योगदान करने के लिए प्रेरित किया।
सितंबर माह में नयी सौर साइट सौर सिंचाई समिति को सौंपने के साथ ही उन्होंने रबी मौसम में सौर सिंचाई का उपयोग कर आलू, गोभी और फूलगोभी सहित अन्य सब्जियों की खेती करने लगी। अब वह खेती से अच्छा लाभ प्राप्त कर रही है। शशिकांत अपने खेत से अब एक वर्ष में तीन फसल का उत्पादन कर रही है। महिला किसान बताती है कि वह अपनी जमीन का एक-एक इंच का उपयोग खेती में कर रही है।
शशिकांत नयी कृषि तकनीकों को अपना कर खेती कर रही है और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही है। आज वह खेती-किसानी से ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर दूसरों के लिए प्रेरणा श्रोत बन गयी हैं।
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