मन की बात का 100वां एपिसोड : जनता से सीधे जुड़ने का अभिनव प्रयोग

 

मनोज कुमार शर्मा 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। जल्द ही रेडियो पर प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का 100वां एपिसोड प्रसारित होगा। इस लोकप्रिय कार्यक्रम के 100वें एपिसोड का रेडियो पर वैश्विक प्रसारण होगा। मन की बात  कार्यक्रम का पहला एपिसोड 03 अक्टूबर 2014 को प्रसारित हुआ था। यह कार्यक्रम प्रत्येक महीने के आखिरी रविवार को रेडियो पर प्रसारित होता है। 

भारत जैसे देश में जिसकी आबादी सवा अरब से ज्यादा हो वहां के प्रधानमंत्री का जनता से सीधा संवाद करने का यह तरीका स्वयं में अभिनव सा है। अब तक यह परिपाटी सी रही थी कि भारत के प्रधानमंत्री चुनावों के समय, राष्ट्रीय पर्वों या किसी खास अवसर पर ही टीवी के माध्यम से जनता को संबोधित करते थे। 

लेकिन, वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात  कार्यक्रम के माध्यम से देशवासियों से किसी खास अवसर की बजाय आम जन के सरोकार वाले प्रत्येक अवसर पर संवाद किया और इसके लिये उन्होंने सर्वसुलभ और देश के 91 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच रखने वाले माध्यम रेडियो को चुना।

हालांकि मन की बात कार्यक्रम दूरदर्शन और अन्य राष्ट्रीय न्यूज चैनलों पर भी प्रसारित होते हैं, पर इसका मुख्य माध्यम रेडियो ही है। जब देश का प्रधानमंत्री स्वयं लोगों से मुखातिब हों और छात्रों से परीक्षा, महामारी, अंगदान, मोटे अनाज के उपयोग, कृषि जैसे विषयों पर संवाद करें तो निश्चय ही देशवासियों के बीच इसका सकारात्मक प्रभाव होता है।

जनता ऐसे प्रसारण से अपने प्रधानमंत्री को अपने करीब एक जिम्मेदार प्रतिपाल की भांति महसूस करती है। जब प्रधानमंत्री स्वयं 10वीं, 12वीं की परीक्षाओं के समय छात्रों को सहज होकर परीक्षा देने का संदेश देते हैं और छात्रों को कहते हैं कि आप टॉपर होने शत-प्रतिशत नंबर लाने का तनाव न लें, कुछ प्रतिशत कम नंबरों से पास होना आप की सफलता में  बाधक नहीं बनता नही इससे आप की योग्यता में कोई कमी आती है, तो परीक्षा के तनाव से गुजर रहे छात्रों, युवाओं को एक राहत मिलती है निश्चय ही उनका मनोबल बढ़ता है। 

मन की बात कार्यक्रम के तकरीबन प्रत्येक एपिसोड में प्रधानमंत्री ने देशवासियों के बीच सकारात्मकता का संचार किया है। इस कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बिंदु है कि पीएम अक्सर सराहनीय कार्यकरने वालों के बारे में नाम लेकर बताते हैं और संवाद भी करते हैं।  
इस कार्यक्रम के जनता से जुड़ाव में सबसे बड़ा योगदान रेडियो का रहा है। 

ग्रीक भाषा में रेडियस का अर्थ दायरा होता है और इसी शब्द से रेडियो का नाम पड़ा क्योंकि रेडियो का प्रसारण एक व्यापक दायरे में होता है। ऐसे में मन की बात कार्यक्रम के लिये रेडियो का चुनाव एक सफल कदम है। प्रधानमंत्री ने मन की बात के लिए रेडियो को चुना। इससे रेडियो को भी इस टीवी, डिजिटल और इंटरनेटयुग में फिर से पुरानी पहचान मिली है।

अब सभी मन की बात कार्यक्रम को गावों कस्बों, खेतों में भी लोगों को रेडियो पर सुनते देखते हैं। यही नहीं रेडियो को कभी-कभार उपयोग में लेने वाले देश भर के महानगरों और शहरों में रहने वाले लोगों ने रेडियो का उपयोग करना प्रारंभ कर दिया है। 

मुंबई और चेन्नई के अलावा 6 बड़े शहरों में किये गये एक सर्वेक्षण से यह पता चला कि कि लगभग 66.7% आबादी ने प्रधानमंत्री के संबोधन को सुनने के लिए ट्यून किया था और इसे बहुत ही अच्छा कहा।  

झारखंड के लोगों के लिए उपलब्धि का क्षण 

संचार का एक सामान्य तथ्य है कि वह आम जन के लिये सुलभ, रूचिकर, प्रेरणादायी भी हो। जब प्रधानमंत्री स्वयं आकर किसी विषय पर जनता के बीच संदेश दें  उन लोगों का नाम लें जो अपने क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे हैं, संघर्ष से अपना लक्ष्य प्राप्त किये हैं या देश समाज के लिये नि: स्वार्थ काम कर रहे हैं तो इसका आम जन में तो व्यापक सकारात्मक प्रभाव होता ही है, उस क्षेत्र के अनय लोग भी इससे प्रेरणा पाते हैं। 

प्रधानमंत्री ने कई एपिसोड में झारखंड में गांव कस्बों तक में बेहतरीन कार्य कर रहे लोगों, युवाओं, महिलाओं, किसानों का नाम लेकर उनके बारे में लोगों को बताया।  सितंबर 2022 में जब प्रधानमंत्री ने रांची के महिला समूह के शोभा दीदी और उनके सहयोगियों के कार्य की सराहना की तो पूरे झारखंड का गौरव बढ़ा। 

75वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने रांची झारखंड के युवा नवीन का विशेष उल्लेख किया और देशवासियों को बताया कि युवा नवीन कैसे झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में लोगों को अवगत करा रहे हैं और बिरसा मुंडा से लेकर सिदो कान्हो व अन्य गुमनाम से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में भी लाग अब जान रहे हैं तो यह झारखंड के लिये बड़ा ही उपलब्धि का क्षण था।  

92वें एपिसोड में गिरिडीह के पीरटांर के मधुबन पंचायम के सिंहपुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र के कुपोषण के खिलाफ किये जा रहे कार्यों की दिल खोल कर सराहना की और झारखंड की यह खबर रेडियो और अन्य माध्यमों से पूरे देश में सुर्खियों में आया।  

दुमका के संजय कच्छप को जिन्होंने अपने प्रयास से चाइबासा समेत अन्य जिलों में 24 लायब्रेरी का निर्माण करवाया है उन्हें लायब्रेरीमैन कह कर जब पीएम ने रेडियो पर पुकारा तो यह झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि थी। वैसे ही गोमो रेलवे स्टेशन जिसे अब सुभाषचंद्र बोस स्टेशन नाम से जाना जाता है, उसके बारे में भी देशवासियों को पीएम ने रेडियो पर अपने कार्यक्रम के माध्यम से ही बताया कि कैसे अंग्रेजों को चकमा देकर  इसी स्टेशन से रेल पर सवार होकर निकलने के बाद नेता जी अंग्रेजों के हाथ नहीं आये। उनके इस सफर को महानिष्क्रमण नाम दिया और स्टेशन का नाम गोमो से सुभाषचंद्र बोस स्टेशन नाम दिया गया। 

कोरोना काल में 31 जनवरी 2021 के अंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में झारखंड के दुमका के शिक्षा मॉडल की चर्चा की। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा जारी रखने के लिए दुमका में किये गये अनूठे प्रयास की सराहना की । 
अभी हाल में प्रसारित 99वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च को अंग दान करने वालों की तारीफ की। अपने संबोधन में उन्होंने झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली स्नेह लता चौधरी का जिक्र किया। 

उन्होंने कहा कि जब अंगदान या देहदान करने वाला कोई मिल जाता है तो उसमें ईश्वर का स्वरूप ही नजर आता है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि झारखंड की स्नेह लता चौधरी ऐसी ही थीं। जिन्होंने ईश्वर बनकर दूसरों को जिंदगी दी। 63 साल की स्नेह लता चौधरी अपना हार्ट, किडनी, आंख और लीवर दान कर के गयीं। 

मन की बात रेडियो पर प्रसारित एक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक देश के मुखिया का अपनी जनता से सीधा जुड़ाव और संवाद है जो जनता और सरकार के बीच संवादहीनता को खत्म करने के साथ ही विश्वास का संचार करता है और बेशक इसके लिए चुना गये माध्यम रेडियो का इसमें  बहुत बड़ा योगदान है। (लेखक स्कूल आॅफ मास कम्युनिकेशन, रांचीविश्विवद्यालय, रांची से जुड़े हैं।)

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