राहुल गांधी को सूरत कोर्ट से मिली राहत

 

  • दो साल की सजा के खिलाफ सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दी फौरी राहत, अब आगे क्या होगा? 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। बीते महीने सूरत के सीजेएम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। आज इस केस में कोर्ट से राहुल को जमानत मिल गई है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता की जमानत 13 अप्रैल तक बढ़ा दी है। 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोदी सरनेम टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ अदालत में अपील करने के लिए सोमवार को सूरत पहुंचे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी भाई राहुल के साथ सूरत आईं। सूरत कोर्ट ने राहुल को 13 अप्रैल तक जमानत दे दी। 

वहीं, उनकी सजा के  खिलाफ सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख दे दी। राहुल के सूरत जाने पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि ये लोग अपील के नाम पर हुड़दंग करने जा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि यह राहुल गांधी के साथ उनकी एकजुटता है। 

मोदी उपनाम केस में अभी क्या हो रहा है?  

बीते महीने सूरत के सीजेएम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इस सजा को चुनौती देने के लिए राहुल को एक महीने का समय दिया था। सजा सुनाये जाने के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता चली गयी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिका तैयार की गयी है। इसी कड़ी में राहुल गांधी ने आज सूरत कोर्ट में याचिका दाखिल की। 

मामला क्या है? 

2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने धारा 504 के तहत राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए 30 दिन की मोहलत दे दी। इसके साथ ही उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी थी। 

दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है? इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

कोर्ट के फैसले के बाद क्या हुआ? 

नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अगले ही दिन 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया। साज सुनाए जाने के 11 दिन बाद राहुल को सूरत कोर्ट ने 13 अप्रैल तक जमानत दे दी। राहुल के मामले अब तीन मई को सुनवाई होगी। 

आगे क्या होगा? 

सूरत कोर्ट में सुनवाई के बाद राहुल की सजा बरकरार रह सकती है या कम भी सकती है, या फिर उन्हें बरी भी किया जा सकता है। अगर सूरत कोर्ट से राहत नहीं मिलती तो राहुल के पास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी होगा। सूरत कोर्ट अगर राहुल की सजा पर रोक नहीं लगाता तो भी राहुल ऊंची अदालतों में जा सकते हैं। 

सांसदी बहाल कराने के लिए राहुल के पास क्या विकल्प? 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता भी बहाल हो सकती है और वो बरी भी हो सकते हैं लेकिन ये सब कुछ ऊपरी अदालत में तय होगा। राहुल के पास अभी कुछ विकल्प बचे हैं, जैसे: 

सबसे पहले, राहुल गांधी को सजा के खिलाफ स्टे आर्डर लेने के लिए सूरत कोर्ट गए हैं। यदि वह अपनी संसद की सदस्यता बरकरार रखना चाहते हैं, तो वायनाड लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने से पहले राहुल गांधी को बरी होना होगा है; केवल उनकी सजा के खिलाफ रोक पर्याप्त नहीं होगी। 

वह 2024 का चुनाव तभी लड़ सकते हैं जब कोई ऊपरी अदालत उनकी सजा को रद्द कर दे, या यदि सूरत की निचली अदालत का फैसला पलट दिया जाए। अगर ऊपरी अदालत निचली अदालत से राहुल गांधी की दोषसिद्धि को रद्द नहीं करती है तो वह 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकते। 

यदि उन्हें सजा से स्थगन आदेश मिलता है, तो उन्हें लोकसभा सचिव को सूचित करना होगा और अनुरोध करना होगा कि वह संसद से अपनी अयोग्यता के नोटिस को रद्द कर दें। यदि लोकसभा राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अयोग्यता की अधिसूचना को रद्द नहीं करती है, तो कांग्रेस नेता लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अदालत जा सकते हैं। 

13 अप्रैल को क्या होगा? 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए सूरत सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील के साथ दो याचिकाएं लगाई हैं, पहली सजा के निलंबन के लिए, जो अनिवार्य रूप से नियमित जमानत के लिए है जबकि दूसरी याचिक दोषसिद्धि के निलंबन के लिए है। 

राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर सोमवार को न्यायालय ने रोक नहीं लगायी। हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी को राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका पर नोटिस जारी किया है। शिकायतकर्ता को 10 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर पी मोगेरा की अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कांग्रेस नेता की याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी। 

तीन मई को क्या होगा? 

तीन मई को दूसरे आवेदन यानी दोषसिद्धि के निलंबन की याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा। यदि याचिका की अनुमति दी जाती है, तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता बहाल हो जाएगी। इसके बाद ही लोकसभा सचिवालय राहुल की लोकसभा सदस्यता अयोग्यता की अधिसूचना को रद्द करेगी। 

मामले में क्या राजनीति हो रही है? 

मानहानि केस में कोर्ट की सजा के खिलाफ याचिका दायर करने जा रहे राहुल के साथ कांग्रेस नेताओं की बड़ी फौज भी सूरत पहुंची है। अब इसको लेकर भाजपा ने निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे नौटंकी करार दिया और कहा कि ये सब लोग अपील के नाम पर हुड़दंग करने जा रहे हैं। 

संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर, कांग्रेस और राहुल से सवाल किया कि क्या ये न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है? वहीं कानून मंत्री और भाजपा नेता कानून मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी जो कर रहे हैं वह भी अपीलीय अदालत पर दबाव बनाने की बचकानी कोशिश है। देश की सभी अदालतें ऐसे हथकंडों से अछूती हैं। 

रिजिजू के बयान पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और  कांग्रेस नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं बना सकता। हम सूरत जा रहे हैं। कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है और राहुल गांधी हमारी पार्टी के बड़े नेता हैं। यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं है। हम उनके साथ खड़े हैं...। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम अदालत के फैसले पर बहस नहीं कर सकते लेकिन हम केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ सकते हैं।

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