एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्षय रोग (टीबी) के खिलाफ जनभागीदारी को भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 2014 के बाद जिस तरह से भारत ने नई सोच और दृष्टिकोण के साथ टीबी के खिलाफ काम करना शुरू किया, वह अभूतपूर्व है। टीबी के खिलाफ इसे वैश्विक लड़ाई का एक नया मॉडल बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को यह जानकारी होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वन वर्ल्ड टीबी समिट में अपने विचार रख रहे थे। मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से भारत ने जिस नई सोच और अप्रोच के साथ टीबी के खिलाफ काम करना शुरू किया है वह वास्तव में अभूतपूर्व है। भारत के ये प्रयास आज पूरे विश्व को इसलिए भी जानने चाहिए क्योंकि टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का एक नया मॉडल है।
उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में भारत ने टीबी के खिलाफ इस लड़ाई में अनेक मोर्चों पर जैसे- जनभागीदारी, पोषण के लिए विशेष अभियान, इलाज के लिए नई रणनीति, तकनीक का भरपूर इस्तेमाल और अच्छी हेल्थ को बढ़ावा देने वाले फिट इंडिया, खेलो इंडिया, योग जैसे अभियान पर एकसाथ काम किया है। प्रधानमंत्री ने टीबी समिट के अपने संसदीय क्षेत्र में आयोजित किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे लिए ये बहुत खुशी के बात है कि वन वर्ल्ड टीबी समिट काशी में हो रही है।
सौभाग्य से मैं काशी का सांसद भी हूं। काशी नगरी शाश्वत धरा है जो हजारों वर्षों से मानवता के प्रयासों और परिश्रम की साक्षी रही है। काशी इस बात की गवाही देती है कि चुनौती चाहे कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, जब सबका प्रयास होता है, तो नया रास्ता भी निकलता है। मुझे विश्वास है, टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ हमारे वैश्विक संकल्प को काशी एक नई ऊर्जा देगी।
पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानने के भारतीय विचार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक देश के तौर पर भारत की विचारधारा का प्रतिबिंब वसुधैव कुटुंबकम् की भावना में झलकता है। ये प्राचीन विचार आज आधुनिक विश्व को एकीकृत दृष्टि दे रहा है, एकीकृत समाधान दे रहा है। इसलिए ही प्रेसिडेंट के तौर पर भारत ने जी-20 समिट की भी थीम रखी है- एक दुनिया, एक परिवार, एक भविष्य! ये थीम एक परिवार के रूप में पूरे विश्व के साझा भविष्य का संकल्प है।
टीबी रोगियों की पहचान और उपचार के लिए उठाये गये कदमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी टीबी मरीज इलाज से छूटे नहीं, इसके लिए हमने नई रणनीति पर काम किया। टीबी के मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए, उनके ट्रीटमेंट के लिए हमने उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा है। टीबी की मुफ्त जांच के लिए हमने देशभर में लैब्स की संख्या बढ़ायी है।
नि-क्षय मित्र पहल को लेकर उन्होंने कहा कि इससे टीबी की चुनौती से लड़ने में बहुत मदद मिली है। टीबी रोगियों के पोषण को बड़ी चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए सरकार 2018 में टीबी मरीजों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत ने जनभागीदारी का बहुत बड़ा काम किया है। टीबी मुक्त भारत के अभियान से जुड़ने के लिए देश के लोगों से नि-क्षय मित्र बनने का आह्वान किया था। इस अभियान के बाद करीब-करीब 10 लाख टीबी मरीजों को देश के सामान्य नागरिकों ने गोद लिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब वर्ष 2025 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। टीबी खत्म करने का ग्लोबल टार्गेट वर्ष 2030 है लेकिन भारत वर्ष 2025 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत में टीबी के मरीजों की संख्या कम हो रही है। कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर को टीबीमुक्त अवार्ड से सम्मानित किया गया है। मैं इस सफलता को प्राप्त करने वाले लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले रिमोट का बटन दबाकर टीबी-मुक्त पंचायत पहल के अलावा एक संक्षिप्त टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) का आधिकारिक रूप से अखिल भारतीय स्तर पर शुभारंभ किया। मोदी ने टीबी के लिए परिवार केन्द्रित देखभाल मॉडल और भारत की वार्षिक टीबी रिपोर्ट 2023 जारी करने सहित विभिन्न पहलों का भी शुभारंभ किया।
प्रधानमंत्री ने टीबी के उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति के लिए चुनिंदा राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों और जिलों को प्रमाण पत्र, पदक और राशि देकर पुरस्कृत भी किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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