साहिबगंज : रोज गड्ढा खोद पानी निकालने को मजबूर हैं इस गांव के लोग

 

  • अब चुनाव का बहिष्कार करने की दी चेतावनी

टीम एबीएन, साहिबगंज/ रांची। आज जहां तकनीक की मदद से देश विकास की ओर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कई ऐसे भी राज्य हैं जहां आज भी लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी का दूषित पानी पीना पड़ता है।

 ताजा मामला साहिबगंज से है जहां रोज सुबह लोगों को पहले चूहे की तरह गड्ढा खोदकर पानी लाना पड़ता है। उसके बाद भी उन्हें पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पता है। जिसके बाद अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को अल्टमेटम दिया है और कहा है कि अगर पानी की समस्या को दूर नहीं किया गया तो अगले चुनाव में सभी चुनाव का बहिष्कर करेंगे। 

दरअसल, झारखंड प्रदेश के सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और विधायक लोबिन हेम्ब्रम के विधानसभा क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीण आज भी पानी की घोर किल्लत झेलने को मजबूर हैं। वहीं, बोरियो प्रखंड के मांझी टोला गांव के दर्जनों ग्रामीण अहले सुबह उठकर सबसे पहले दो किलोमीटर दूर नदी में जाकर चूहे की तरह गड्ढा खोदते हैं। इसके बाद उसमें जो पानी निकलता है, उसी पानी से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं।

ग्रामीणों को यहां किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है, बल्कि हर दिन पीने के पानी के खोज में दो किलोमीटर दूर जाकर बहते नदी की धार के किनारे चूहे ही तरह उन्हें गड्ढा खोदना पड़ता है। ताकि जो पानी खोदे हुए गड्ढा से निकले उसे घड़ा एवं अन्य बर्तनों में भरकर अपने घर ने जा सकें, लेकिन इसमें हैरानित की बात ये है कि यह दिल को कचोटने वाली तस्वीर जहां की है। वहां से प्रखंड मुख्यालय महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रत्येक दिन पानी जैसी घोर किल्लत की समस्याओं से जूझ रहे करीब एक सौ परिवार के महिलाओं का कहना है कि पानी जैसी समस्या को देख उनकी नम आंखों से आंसू निकल आते हैं। गांव में कुल सौ घरों की आबादी हैं, फिर भी ना गांव में कोई चापाकाल है और न ही कोई कुंआ है। 

जिस के कारण हम सभी ग्रामीण महिलाएं प्रत्येक दिन गांव से दो किलोमीटर दूर जाकर नदी के किनारे गड्ढा खोदकर गंदे पानी को लाते हैं और उसी से अपना जीवन यापन करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के गंदे पानी को पीने से हमसब बीमार भी पड़ रहे हैं। आक्रोशित ग्रमीणों ने कहा कि अगर हमारे गांव में पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हम सभी गांव की महिला आने वाले चुनाव में जो भी जनप्रतिनिधि यहां आयेंगे तो सबसे पहले उन्हें हम बांधक बना लेंगे और फिर उनकी पिटाई करेंगे। 

यहीं नहीं आने वाले चुनाव में हम सभी वोट का बहिष्कार भी करेंगे। अब देखने वाली बात ये होगी कि जिला प्रशासन व विधायक ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होते हैं या फिर नहीं।

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