टीम एबीएन, कोडरमा। होलिका दहन का पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को लोग रंगोत्सव के रूप में होली का त्योहार मनाते हैं। इस साल होली पर तिथियों का ऐसा संयोग बना है, जिससे लोगों में उलझन है।
इस बारे में मां तारा ज्योतिष संस्थान के आचार्य अनिल मिश्रा ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार होलिका दहन इस साल व्रत की पूर्णिमा के साथ 6 मार्च सोमवार को रात्रि के अंतिम प्रहर (ब्रह्म मुहूर्त) में भद्रा समाप्त होने पर 4:49 बजे के बाद शुभ योगों में किया जायेगा। 7 मार्च मंगलवार को स्नान दान की पूर्णिमा का पर्व मनाया जायेगा।
अनिल मिश्रा ने कहा क इस वर्ष होली पर दो पूर्णिमा होने के कारण रंगोत्सव, रंग गुलाल वाली होली 8 मार्च बुधवार को मनायी जायेगी। दरअसल इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 6 मार्च को अपराह्नकाल पर होगा, जिसके कारण प्रदोष व्यापिनी व्रत की पूर्णिमा का मान रहेगा एवं 7 मार्च को सायंकाल तक काल तक रहने के कारण उदय कालीन स्नान दान पूर्णिमा का मान होगा।
उन्होंने कहा कि शास्त्र के अनुसार भद्रा मुक्त प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा पर ही होलिका दहन होना चाहिए। परंतु प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में रात्रि के तीनों प्रहर भद्रा युक्त होने के कारण होलिका दहन 6 मार्च सोमवार को रात्रि के अंतिम प्रहर 4:49 बजे के बाद करना उत्तम होगा। जबकि कुछ अन्य पंचांगों ने भद्रा पुच्छ (मध्यरात्रि) में हीं होलिका दहन कर लेने का निर्णय दिया है एवं रंगों वाली होली 8 मार्च को खेली जायेगी।
उन्होंने कहा कि इस साल होली का त्योहार ज्यादा खास रहने वाला है। दरअसल, होली के मौके पर शनि 30 साल बाद स्वराशि कुंभ और 12 साल बाद देव गुरु बृहस्पति स्वराशि मीन में विराजमान रहने वाले हैं। इसके अलावा, कुंभ राशि में त्रिग्रही योग बना रहेगा। होली पर ग्रहों की ऐसी स्थिति पूरे 30 वर्ष बाद बन रही है।
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