एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक का संबोधन करते हुए भारत पहुंचे जी20 देशों के विदेश मंत्रियों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि यह बैठक एकता, एक उद्देश्य और कार्रवाई की एकता की जरूरतों को बल देता है। मुझे उम्मीद है कि आज की आपकी बैठक आम और ठोस उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक साथ आने की भावना को दर्शायेगी।
जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत ग्लोबल साउथ की आवाज है। जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करने से पहले तुर्की और सीरिया में हाल ही में आए भूकंपों में जान गंवाने वाले लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखा गया।
बता दें कि जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक आज दिल्ली में हो रही है। बैठक से पहले भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने जर्मनी की विदेश मंत्री अन्नालीना बाएबॉक की आगवानी की। वे बैठक में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचीं हैं। गुरुवार (दो मार्च) को बैठक में शामिल होने के लिए साऊदी अरब, चीन, इंडोनेशिया, स्पेन और क्रोएशिया के विदेश मंत्री भारत पहुंचे हैं।
हम सभी को स्वीकार करना चाहिए कि बहुपक्षवाद आज संकट में : प्रधानमंत्री
जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम सभी को यह स्वीकार करना चाहिए कि बहुपक्षवाद आज संकट में है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनायी गयी वैश्विक शासन की वास्तुकला दो कार्यों को पूरा करने के लिए थी। उनमें पहला- प्रतिस्पर्धी हितों को संतुलित करके भविष्य के युद्धों को रोकना था जबकि जबकि दूसरा सामान्य हित के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था। पीएम ने कहा वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद और युद्धों के पिछले कुछ वर्षों के अनुभव से स्पष्ट है कि वैश्विक शासन अपने दोनों जनादेशों में विफल रहा है।
पीएम बोले- प्रभावित लोगों की सुने बिना कोई भी समूह वैश्विक नेतृत्व का दावा नहीं कर सकता
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में कोई भी समूह अपने निर्णयों से सर्वाधिक प्रभावित लोगों की बात सुने बिना वैश्विक नेतृत्व का दावा नहीं कर सकता। यह बैठक गहरे वैश्विक विभाजन के समय में हो रही है। विदेश मंत्रियों के रूप में ये स्वाभाविक है कि आपकी चर्चा भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित होगी।
पीएम बोले- दुनिया विकास, आर्थिक लचीलापन, आपदा लचीलापन, वित्तीय स्थिरता, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, विकास की चुनौतियां को कम करने के लिए जी-20 की ओर देख रही है। इन सभी में जी-20 में आम सहमति बनाने और ठोस परिणाम देने की क्षमता है।
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