टीम एबीएन, रांची। विज्ञान और तकनीक हेल्थ सेक्टर में आये दिन कुछ नई मशीनें लेकर आ रहे हैं, जो मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी रामबाण होते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं झारखंड की राजधानी रांची की। यहां धुर्वा स्थित पारस एचईसी हॉस्पिटल में 3डी विजन के माध्यम से लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन किया गया है।
पारस हॉस्पिटल के डॉक्टर संजय ने ABN से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि 3डी विजन आने से न सिर्फ मरीजों को फायदा होगा, बल्कि हम जैसे डॉक्टर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और जब डॉक्टर का कॉन्फिडेंट होगा तो ऑपरेशन बेहतर और सटीक होगा। हेल्थ सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी एक क्रांति है। डॉक्टर संजीव कुमार ने कहा कि लेप्रोस्कोपिक में रोगी के पेट में पोर्ट से छेद कर कार्बन डाईऑक्साइड गैस भरी जाती है। ऐसा करने से रोगी का पेट फूल जाता है।
इसके बाद तीन और सूराख बनाये जाते हैं। इन तीन सूराखों में एक से एचडी कैमरा और दो से सर्जरी उपकरण पेट के अंदर डाले जाते हैं। कंसोल की मदद से चिकित्सक पेट के भीतर उपकरणों के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं और उस हिस्से को काट-काट कर निकालते हैं, जो बीमारी का कारण होता है। 3डी कैमरे से हमें स्पष्ट रूप से चीजें दिखती हैं। सबसे बड़ी बात है कि हम काफी गहराई तक जा कर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे बारीक नसें बहुत आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। साथ ही बहुत स्पष्ट दिखाई देने से ऑपरेशन भी बहुत जल्द और सटीक होता है। इस ऑपरेशन में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता।
डॉक्टर संजीव कुमार कहते हैं इस ऑपरेशन में आधुनिक मशीन का उपयोग होगा। पर इसमें कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं है। सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50,000 रुपये का खर्च आता है, 3डी के बाद भी इसका खर्च यही रहेगा। साथ ही 24 घंटे के अंदर हम मरीज को डिस्चार्ज कर देते हैं। इससे मरीज बड़ी जल्दी स्वस्थ होगा व जल्दी डिस्चार्ज होगा तो खर्च भी कम आयेगा। लेप्रोस्कोपिक 3डी माध्यम से ऑपरेशन करा चुकीं कविता कहती हैं कि ऑपरेशन के बाद बहुत जल्दी डिस्चार्ज कर दिया गया। जिस वजह से खर्च काफी कम आया व आराम भी है।
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