टीम एबीएन, खूंटी/ रांची। खूंटी जिले में आज भी एक गांव के लोग गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं। जबकि झारखंड को बने 22 साल और खूंटी जिले को बने 15 वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद आज भी गड्ढे का पानी पीने के लिए खूंटी विधानसभा क्षेत्र के गर्रा प्रखंड अंतर्गत गांव की ग्रामीण मजबूर हैं।
जिले के कर्रा प्रखंड अंतर्गत छाता पंचायत में जंगल की बीच कारो नदी के किनारे पंडरा गांव का स्थित है। यहां के लोग आज भी सूखी नदी के बीच बालू खोदकर पानी निकालते हैं और अपनी प्यास बुझाते हैं। लेकिन आज तक इस ओर यहां के जनप्रतिनिधि और प्रशासन ने इनकी सुध नहीं ली। ग्रामीणों को खाना बनाने और पीने का पानी के लिए घण्टों तक समय लग जाता है। क्योंकि जब तक गड्ढे का पानी साफ ना हो जाये तब तक पानी को कटोरे से छिंटती रहती है।
जब पानी साफ हो जाता है तब उसे कटोरा, डेगची या अन्य बड़े पात्र में डालती हैं। पंडरा गांव जंगलों के बीच हाथियों से प्रभावित क्षेत्र में है। जिन्हें दिन में पानी की समस्या झेलनी पड़ती है तो वहीं रात में रात में हाथियों का भय रहता है। यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि हर बार विकास के वादे तो करते हैं लेकिन आज तक कोई भी योजना धरातल नहीं उतर पायी है।
गांव में रहने वाली शकुंतला देवी ने बताया कि यहां पीने या खाना बनाने के लिए बस सूखे कारो नदी को गड्ढा करके पानी जमा किया जाता है, जिसमें कीड़ा भी रहता है, लेकिन प्यास बुझाना है तो पीना ही पड़ेगा और भूख मिटाना हो तो इसी पानी से खाना बनाना पड़ता है। जिस पानी में घुसने से जानवर भी कतराते हैं उसी पानी से नहाना पड़ता है।
शकुंतला ने आंख में आंसू लिये बताया कि पानी की समस्या को लेकर कोई भी बाप अपनी बेटी की शादी की शादी इस गांव में नही करना चाहता है। यही कारण है कि पुरुष का विवाह जल्दी नहीं हो पाता है। जब पुरुष कहता है इस गांव से दूर कहीं और ले जाकर जीवन यापन करेंगे तभी यहां के लड़कों की शादी हुई है।
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