हिंदी में विश्व भाषा बनने की क्षमता, संयुक्त राष्ट्र की भाषा के रूप में मिले मान्यता : समीर कुमार सिंह

 

विश्व हिंदी दिवस पर कार्यक्रम 

टीम एबीएन, पटना। जगदंबी प्रसाद यादव स्मृति संस्थान और अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद के तत्वावधान में विश्व हिंदी दिवस का आयोजन पूर्वी गांधी मैदान स्थित महेश भवन में किया गया। कार्यक्रम में विधान पार्षद समीर कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रुप में तथा वरिष्ठ साहित्यकार और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जियालाल आर्य, गोरे लाल यादव, वरिष्ठ साहित्यकार और नई धारा के संपादक डॉ शिवनारायण, संस्थान के अध्यक्ष और विश्व हिंदी दिवस के प्रस्तावक वीरेंद्र प्रसाद यादव, महासचिव डॉ अंशु माला, लोक गायिका नीतू नवगीत, बिहार राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी दिलीप कुमार आदि ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक गायिका नीतू नवगीत ने हिंदी है भारत की बोली तो अपने आप पनपने दो गीत से कार्यक्रम का प्रारंभ किया। संस्थान का वार्षिक प्रतिवेदन महासचिव डॉ अंशुमाला ने प्रस्तुत किया। 

विषय प्रवर्तन करते हुए संस्थान के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि हम हिंदी के बात करते हैं पर हिंदी में नहीं करते। हम हिंदी का विकल्प अंग्रेजी में ढूंढते हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने वर्ष 1936 में भारत के हिंदी तरह राज्यों में हिंदी के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से अपनी कर्मस्थली वर्धा में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना की थी। उनके प्रयासों से पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत में भी हिंदी को स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि उनके ही मूल प्रस्ताव पर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में स्वीकार किया गया और 2006 से पूरी दुनिया में विश्व हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। 

मुख्य अतिथि डॉ समीर कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की भाषा है। फिजी, मॉरीशस, सुरीनाम, ब्रिटेन, रूस, चीन, नेपाल, पाकिस्तान सहित अनेक देशों में हिंदी बोलने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी को पूरी दुनिया में सम्मान मिलना चाहिए। नई धारा के संपादक शिवनारायण ने कहा कि हिंदी भारोपीय परिवार की एक महत्वपूर्ण भाषा है। हिंदी के विस्तार के लिए हर भारतीय को प्रयास करना चाहिए। साहित्यकार और पूर्व प्रशासक जियालाल आर्य ने कहा कि भारत में सबसे अधिक लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं। हिंदी ज्ञान विज्ञान के साथ रोजगार की भाषा भी है। वरिष्ठ साहित्यकार और पूर्व प्रशासक गोरे लाल यादव ने कहा कि हिंदी में उच्चतर शिक्षा का माध्यम बनने का स्वाभाविक गुण है। हिंदी को प्रशासन की भाषा मान ली गई है। इसे न्याय की भाषा के रूप में भी स्वीकार किया जाना चाहिए। 

हिंदी दिवस पर संगोष्ठी के बाद विश्व हिंदी दिवस पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसका संचालन कलानेत्री पल्लवी विश्वास ने किया। कवि गोष्ठी में डॉ कासिम खुर्शीद, शहंशाह आलम, मधुरेश कांत शरण, सिद्धेश्वर, आनंद मिश्रा, अरुण सार्दुल, कल्याणी कुसुम प्रभात, कुमार धवन, डॉ आरती कुमारी, मासूमा खातून, चितरंजन भारती, डॉ नागेंद्र शर्मा, रत्ना पुरकायस्थ, डॉ नीलिमा सिंह, राज प्रिया रानी आदि ने अपनी कविताओं का पाठ किया। 

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