कोरोना के नये वेरिएंट से डरें नहीं, बस सचेत रहें, सावधानी अपनायें : डॉ तापस

 

  • मेदांता रांची में है कोविड के इलाज की उच्च स्तरीय सुविधा 
  • कोरोना के नये वेरिएंट से घबरायें नहीं, लक्षण दिखाई देने पर करें डॉक्टर से संपर्क : डॉ तेजवीर 
  • प्रोटीन वाली चीजें खायें, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें : डॉ तेजवीर 

टीम एबीएन, रांची। देश में बीएफ 7 वैरिएंट के मामले अभी बहुत कम आए हैं। देश में उस स्तर पर सर्कुलेट नहीं हुआ है। ये बातें मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची के डॉक्टर तापस साहू ने कही। हालांकि उनका यह भी कहना था कि यह वेरिएंट बहुत तेजी से इनफैक्ट करता है और फैलता है। कोरोना के जितने भी ओमीक्रोन वेरिएंट आये थे, वह बहुत ही लो डेंसिटी के हैं। मतलब यह कि अगर कोई इनफेक्टेड होता भी है तो उसके लक्षण बहुत माइल्ड होंगे।  

डॉक्टर तेजवीर सिंह ने कहा कि देश में पिछले साल जनवरी-फरवरी में ओमीक्रोन की एक लहर आ चुकी थी। इससे देशवासियों में नेचुरल इम्युनिटी बन चुकी है। देश की अधिकतर आबादी कोविड-19 वैक्सीन के दो टीके ले चुकी है। बावजूद इसके हमें तैयार रहना होगा। घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी ने बूस्टर डोज नहीं लिया है तो वह बिना देरी किए ये डोज ले ले, साथ ही मास्क पहनने और हाथों को सैनिटाइज करने पर विशेष ध्यान दें। बुजुर्ग, प्रेग्नेंट औरत या वैसे लोग जो हृदय, फेफड़े, किडनी की बीमारी के साथ डायबिटीज से ग्रसित है। उन्हें थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। 

डॉक्टर तेजवीर ने बताया कि मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची में कोरोना के इलाज के लिए सारी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है। यहां आईसीयू, टेस्टिंग, आइसोलेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर कोई कोरोना का मरीज आता है तो एक पल्मनोलॉजिस्ट लक्षण को देखता है। उसके बाद से आरटी और पीसीआर होता है। जिसकी रिपोर्ट 4 घंटे के अंदर चली जाती है। पॉजिटिव मरीज के लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड हैं। अगर हमारे पास कोई संदिग्ध मरीज आता है तो उन्हें मेन आईसीयू में शिफ्ट नहीं करते हैं बल्कि उन्हें आइसोलेशन आईसीयू में शिफ्ट किया जाता है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती मरीज अलग आइसोलेशन में ही रहता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है तो उन्हें कोविड आइसोलेशन में शिफ्ट कर दिया जाता है। हमारे पास विशेष स्टाफ, विशेष नर्स, ग्राउंड स्टाफ भी हैं। पूरी फोर्स अलग है। अगर कोई कोविड पेशेंट आता है तो प्रॉपर सफाई करके दरवाजे से पेशेंट को ऊपर ले कर जाते हैं। इसके अलावा हमारे वार्ड बॉय अलग हैं। हमारे पास पल्मनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन की भी अलग टीम है। जरूरत पड़ने पर 24 घंटे सातों दिन आईसीयू के डॉक्टर हैं। 

वहीं मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची के एमडी, पलमोनरी मेडिसिन और कंसलटेंट, पलमोनरी डॉक्टर तेजवीर सिंह ने बताया कि कोरोना का जो नया बीएफ 7 वेरिएंट आया है। यह कोरोना के ओमीक्रोन का ही सब वेरिएंट है। इसमें म्यूटेशन हो जाता है, उसे बीएफ सेवन के नाम से जाना जाता है। कोविड में पहले नेटिव वीटा था, फिर डेल्टा हुआ, ओमीक्रोन आया। अब ओमीक्रोन के म्यूटेशन के बाद बीएफ 1, बीएफ 2 आया और अब बीएफ 7 आया है। मूल रूप से यह ओमीक्रोन का ही सब-वेरिएंट है। 

डॉ तेजवीर से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह कितना घातक है, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। क्योंकि अपने देश में ज्यादा मामले आए नहीं है। जितनी स्टडी हुई है, उससे यह पता चला है कि इस वेरिएंट की ट्रांसमिसिबिलिटी तेज है। यह फैलता बहुत जल्दी है और मोरटालिटी कम है। अपने देश में इसे वेरिएंट आॅफ कंसर्न का नाम दिया गया है। वेरिएंट की ट्रांसमिसिबिलिटी ज्यादा है। इससे अगर हॉस्पिटलाइजेशन ज्यादा हो, इम्यूनिटी को क्रॉस कर सके इसे वैरीअंट आॅफ कंसर्न कहा जाता है। अभी स्टडी चालू है। अब तक जितने भी स्टडी आए हैं, उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि अभी घबराने वाली कोई बात नहीं है। 

डॉक्टर तेजवीर यह भी बताते हैं कि अपने देश की हम चीन से तुलना नहीं कर सकते। दोनों में बहुत फर्क है। चीन में वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। चीन लॉकडाउन में था। अपने देश में पहले तीन लहरें हो चुकी हैं। देश की 80 प्रतिशत आबादी वैक्सीनेशन ले चुकी है। जो वैक्सीनेशन ले चुके हैं उनमें नेचुरल इम्यूनिटी है। इस नए वेरिएंट के लक्षण को लेकर बहुत सारे अफवाह उठ रहे हैं कि इसके लक्षण नये हैं। लेकिन जितनी भी स्टडी आई है उसके अनुसार लक्षण वही पुराने वाले हैं। बुखार, खांसी, सर्दी जुकाम, नाक का बंद होना, गले में खराश, गले में दर्द जैसे ही पुराने लक्षण है। जिनको भी लक्षण आ रहे हैं उन्हें खुद को आइसोलेट करना चाहिए। टेस्ट कराने चाहिए। टेस्ट कराना बहुत जरूरी है। जब तक टेस्ट नहीं करायेंगे तो पता नहीं चलेगा। मान लिया कि हल्के लक्षण हीं है। आइसोलेट होना पड़ा। डॉक्टर के पास आरटी-पीसीआर पॉजिटिव आएगा तो उसे जीनोम सिक्वेंस के लिए भेजा जायेगा। तब पता चलेगा कि कौन सा वेरिएंट है? इसलिए टेस्ट कराना बहुत जरूरी है। 

डॉक्टर तेजवीर का यह भी कहना है कि वैसे लोग जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और जो किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, उनको सचेत रहने की जरूरत है। अगर कोई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी की बीमारी से ग्रसित है तो उनको थोड़ा ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। इससे बचने के लिए वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। डॉक्टर तेजवीर यह भी बताते हैं कि खाने-पीने में बेहतर खुराक का ख्याल जरूर रखें। विटामिन, मिनरल का सेवन करें। डायट को दुरुस्त रखें। बाहर का खाना संभव हो तो न खायें। फास्ट फूड छोड़ दें। प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा खायें।

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