एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि इस्पात मंत्रालय ने 2005 से 2022 के बीच कार्बन उत्सर्जन में 15 प्रतिशत तक की कटौती की है एवं 2030 तक इसमें 10 प्रतिशत और कटौती करने का लक्ष्य रखा है।
इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बन गया है और पिछले आठ साल में देश की उत्पादन क्षमता दोगुनी हो गई है।
सिंधिया ने कहा कि इस्पात मंत्रालय 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घावधि के उपाय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अल्पावधि के तहत 2030 तक ऊर्जा एवं संसाधन दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा आदि के उपयोग को बढ़ावा देकर कार्बन उत्सर्जन में कमी पर ध्यान दिया गया है।
इसी प्रकार मध्यावधि में 2030 से 2047 के बीच हरित हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण पर जोर दिया गया है तथा दीर्घावधि के तहत 2047 से 2070 तक के लिए उपाय किए जाने हैं। उन्होंने कहा कि इस्पात उद्योग में अकार्बनीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपाय किये गये हैं।
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