एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया में बड़े डिजिटल प्लेटफार्म वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी गूगल पर एक हफ्ते के भीतर दो बार बड़ा जुमार्ना लगाकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने चेताया है कि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकते। साथ ही यह भी कि उसे भारतीय हितों की अनदेखी की इजाजत नहीं दी जा सकती। उम्मीद की जानी चाहिए कि दो चरणों में दो हजार दो सौ करोड़ के भारी-भरकम जुर्माने के बाद कंपनी के निरंकुश व्यवहार में कमी आयेगी। प्रतिस्पर्धा आयोग ने अनुचित तौर-तरीके अपनाने के प्रति गूगल को चेताया भी है। दरअसल, गूगल अपने एप डाउनलोड करने वाले प्ले स्टोर के वर्चस्व का लाभ उठाकर तमाम एप डेवेलपर्स पर दबाव डालती रही है कि वे अपने एप से संबंधित सभी भुगतान गूगल के भुगतान प्लेटफॉर्म के जरिये ही करें। इसको लेकर प्रतिस्पर्धा आयोग ने चेतावनी दी है कि एप डेवेलपर्स को अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म का ही प्रयोग करने को बाध्य न करे। दरअसल, इससे पहले सीसीआई ने एंड्रॉयड मामले में अपने वर्चस्व का दुरुपयोग करने का आरोप गूगल पर लगाया था। आरोप था कि गूगल स्मार्टफोन निर्माताओं को बाध्य करती रही है कि वे प्रत्येक फोन में गूगल एप्स को अनिवार्य रूप से शामिल करें, तभी उन्हें एंड्रॉयड तकनीक के प्रयोग की इजाजत मिलेगी। गूगल की इस हरकत को सीसीआई ने बाजार में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा कानून का अतिक्रमण बताया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रतिस्पर्धा आयोग गूगल पर अन्य मामलों में सीमाएं लांघने पर जुमार्ना लगा चुका है। दरअसल, पूरी दुनिया में गूगल अपने वर्चस्व के चलते अनैतिक कारोबार का सहारा ले रहा है। यही वजह है कि यूरोपीय यूनियन, आस्ट्रेलिया तथा दक्षिण कोरिया समेत कई देश गूगल पर जुमार्ना लगा चुके हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गूगल के वर्चस्व को तोड़ने के लिये दुनिया के तमाम देश विकल्प तलाशने की जुगत में लगे हैं। भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग अन्य मामलों में भी गूगल की अनियमितताओं की निगरानी कर रहा है। विगत में भी विदेशों व भारत में मीडिया संस्थान नियमों का उल्लंघन करके समाचारों से मुनाफा कमाने के आरोप गूगल पर लगते रहे हैं। बाकायदा आस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों ने इस बाबत जुर्माना भी वसूला है। बहरहाल, सीसीआई द्वारा गूगल पर लगाया गया जुर्माना साफ संदेश है कि वह अनुचित व्यावसायिक परिपाटियों से परहेज करे। भारत में हालिया जुमार्ने उसे अमेरिकी तकनीकी दिग्गज एंड्रॉइड मोबाइल डिवाइस को लेकर अपने दबदबे का दुरुपयोग व एप डेवेलपर्स को भारत में तीसरे पक्ष की बिलिंग भुगतान सेवाओं को बाधित न करने के निर्देश के रूप में लगाये गये हैं। इस कार्रवाई के बाद गूगल प्रबंधन बचाव की मुद्रा में है और दलील दे रहा है कि वह इन सेवाओं के उपयोगकर्ताओं तथा डेवेलपर्स को बेहतर सेवाएं देने के लिये प्रतिबद्ध है। साथ ही यह कि उसने भारतीय मॉडल में कम लागत रखते हुए डिजिटल मुहिम में योगदान दिया है। सीसीआई की कार्रवाई का मकसद यही है कि डिजिटल डोमेन में स्वस्थ स्पर्धा का विकास हो। साथ ही बड़े खिलाड़ियों को इस बाजार में एकाधिकार करने से रोका जा सके। निस्संदेह, भारत में गूगल के लिये बड़ा बाजार है, जिसे वह गंवाना नहीं चाहेगा। उल्लेखनीय है कि देश के साठ करोड़ स्मार्टफोन में से 97 फीसदी एंड्रॉइड आॅपरेटिंग सिस्टम से संचालित हैं। वहीं दूसरी ओर समाचार सामग्री के जरिये अनुचित राजस्व हासिल करने के बाबत शिकायतों पर सीसीआई के निर्देश पर तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही गूगल की कार्यप्रणाली की जांच कर रहे हैं। जिसमें समाचार के स्रोत वाले संस्थानों को भुगतान किये बिना मुनाफा कमाया जा रहा है। इसकी शिकायत न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एवं डिजिटल एसोसिएशन ने की थी। दरअसल, पारदर्शिता के अभाव में डिजिटल मीडिया घरानों ने गूगल के राजस्व साझेदारी मॉडल के चलते नुकसान उठाया है। तकनीकी दिग्गजों की कार्यप्रणाली के नियमन के लिये सीसीआई को अधिक कानूनी अधिकार दिये जाने चाहिए। इस बाबत भारत को पश्चिमी देशों के मॉडल से सीख लेनी चाहिए। इन देशों में डिजिटल मार्केट में कॉपीराइट का अधिकार समाचार संगठनों को हासिल हो पाया, जो उनकी सामग्री के अनुचित उपयोग पर मुआवजा प्रदान करने की राह सुगम करता है।
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