एबीएन हेल्थ डेस्क। केरल में एवियन इंफ्लुएंजा के बढ़ते खतरे के बीच केंद्र सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को एवियन फ्लू से जुड़े मामलों की जांच के लिए सात सदस्यीय एक दल को केरल भेजा है। यह दल जांच के बाद अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा और इसे रोकने के तरीके बतायेगा। एवियन फ्लू को बर्ड फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। यह इन्फ्लूएंजा (फ्लू) टाइप ए वायरस के संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। दुनियाभर में जंगली पक्षियों में इसका प्रकोप देखा जाता रहा है, पक्षियों के संपर्क में आने वाले इंसानों में भी इस संक्रमण का जोखिम होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस फ्लू को काफी घातक माना जाता है, इसके कारण इंसानों में मृत्यदर 56 फीसदी से अधिक देखी गई है। मानव संक्रमण, मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों या दूषित वातावरण के सीधे संपर्क के माध्यम होता है। यह शरीर में कई प्रकार की गंभीर जटिलताओं का कारण बनने के साथ कुछ स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन स्थानों पर इस प्रकार के संक्रमण का खतरा हो वहां जाने से बचना चाहिए। आइए इस गंभीर संक्रमण के बारे में विस्तार से जानते हुए इससे बचाव के उपायों के बारे में समझते हैं। बर्ड फ्लू एक प्रकार के इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, हालांकि इससे सीधे तौर पर इंसानों के प्रभावित होने का जोखिम नहीं होता है। यह पक्षियों, मुर्गों में होने वाला संक्रमण है जिनके माध्यम से यह इंसानों में संक्रमण का कारण बनता है। एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू का प्रकोप देखा जा चुका है। कुछ मामलों में, बर्ड फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खुले बाजार में जहां अंडे और मुर्गे बेचे जाते हैं, या जहां पर पोल्ट्री फार्म्स होते हैं वहां से संक्रमण के बढ़ने का खतरा सबसे अधिक देखा गया है।
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