टीम एबीएन, बड़कागांव (हजारीबागा)। झारखंड के उत्कृष्ट किसान सह हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत लोचर निवासी जाने-माने किसान मीनू महतो ने धान बुनाई की थी। 16 एकड़ बाग धान का पौधा का ग्रोथ रोपाई की गई धान से भी अधिक होने के कारण किसान मीनू महतो काफी प्रफुल्लित हैं। उन्होंने बड़कागांव के तीन पत्रकार नरेश कुमार उग्रसेन गिरी एवं सदानंद शर्मा का टीम को बाग धान का ग्रोथ दिखाते हुए कहा कि कोई भी हाइब्रिड या बोरा बंदी धान सील किस्म उन्नत प्रभेद (एक पैदावारी के बाद दूसरे वर्ष) पूर्व की भांति बुनाई के बाद बिना विदाई एवं घास की निकाई किए हुए अच्छी पैदावारी हो रही है। किसान को इसकी जानकारी नहीं रहने के कारण लोग सिर्फ बिजडा बोने के इंतजार में समय पर खेती नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर इसका सेमिनार लगाकर किसानों को प्रशिक्षित करने का काम यदि की जाए तो कम पूंजी की लागत से किसानों को बाग धान में अच्छी पैदावारी के साथ अच्छी मुनाफा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिस प्रकार देहाती धान का बुनाई रोहनिया नक्षत्र एवं इसके आसपास के नक्षत्रों में हमारे पूर्वज करते थे। उसी प्रकार खेतों की जुताई सुख रुकवा में ही कर घास को गर्मी में ही मरा देना है और जैसे ही एकाद बरसा हो और जमीन में हाल (नमी) हो जाए तो उसी समय बाग धान की बुआई करनी है। उन्होंने कहा कि मोटा धान 350- 400 ग्राम के बीच एवं पतला धान लगभग 300 ग्राम प्रति कट्ठा बुनाई करना है। ठीक आठ 10 दिन के बाद जैसे ही धान जन्म जाए उसमें घास मारने वाला दवा नॉमिनी गोल्ड या काउंसिल एक्टिव का छिड़काव करना है। इसके अलावा 2 किलो डीएपी, आधा किलो पोटाश एवं आधा किलो यूरिया खाद प्रति कट्ठा प्रति (4 डिसमिल) एवं पुन: 22 दिन के बाद डेढ़ किलो प्रति कट्ठा यूरिया खाद का छिड़काव कर देना है। जाने-माने किसान श्री महतो ने आगे बताया कि इस वर्ष मैं 16 एकड़ भूमि पर बाग धान का बुआई किया हूं जो फसल अच्छी रूप से ग्रोथ होते हुए फसल लहलहा रही है। पिछले वर्ष भी बाग धान की मैं अच्छी पैदावारी का मजा ले चुका हूं। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में रोपाई की इंतजार नहीं बल्कि पूर्व की भांति समय पर बाग धान की बुनाई कर अच्छी पैदावारी लेने का काम करें। वहीं बड़कागांव के किसान प्रवीण कुमार ने कहा कि अनियमित वर्षा के कारण वर्तमान समय में बाग धान की बुनाई की नितांत आवश्यकता है मैं भी इस वर्ष लगभग 6 एकड़ भूमि पर बाग धान की बुनाई किया हूं जिसका अब तक की फसल अच्छी रूप से लहलहा रही है। श्री कुमार ने आगे कहा कि धान की खेत का जोताई रवि फसल के समय करना नितांत आवश्यक है तत्पश्चात मई- जून महीना में भी घास मारने के लिए खेत को जोतना उतना जरूरी है तभी बाग धान का लाभ मिल सकती है। किसान मीनू महतो द्वारा पत्रकार एक टीम को कई तकनीकी के माध्यम से अपने बागवानी में कई तरह का पेड़ पौधा एवं सब्जी पैदा करने की विधि की जानकारी दी गई।
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