एबीएन हेल्थ डेस्क। आज की लगातार बदल रही जीवन शैली और भागदौड़ वक्त में कब किसे क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। कोरोना काल के बाद लोगों के जीवन में अप्रत्याशित रूप से बदलाव आए हैं। कई नई बीमारियों ने भी एक घर कर लिया है। इससे कोई भी अछूता नहीं है। इन्हीं बीमारियों में अर्थराइटिस भी अब शामिल हो गया है। जो तेजी से लोगों में फैल रहा है और लोगों को अपना शिकार बना रहा है। वर्ल्ड अर्थराइटिस डे पर मेदांता रांची ने लोगों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि यह ऐसी बीमारी है जो अब हर उम्र के लोगों को अपने चपेट में ले रही है। जीवन शैली में बदलाव करके काफी हद तक इस बीमारी से बचा जा सकता है। मेदांता रांची के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलेश मिश्रा कहते हैं, हर साल 12 अक्टूबर को वर्ल्ड अर्थराइटिस डे मनाया जाता है। ऐसे में हमारी कोशिश लोगों के बीच में यह अवेयर करने की होती है कि किसी भी बीमारी को लोग छोटा नहीं समझे। अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है। जिससे लोगों को चलने या बैठने में तकलीफ होती है और अगर इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिए दिया गया तो भारी परेशानी हो सकती है। निलेश यह भी बताते हैं कि कोरोना के बाद युवाओं में अर्थराइटिस से जुड़े गठिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। मेदांता रांची के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलेश मिश्रा कहते हैं कि पहले अर्थराइटिस की बीमारी सामान्य तौर पर 40- 45 साल के बाद देखने को मिलती थी लेकिन अब इसके फैलाव में काफी तेजी हो गई है। हर रोज मेदांता रांची में बड़ी संख्या में वैसी महिला और पुरुष पहुंच रहे हैं जो जोड़ों के दर्द से परेशान हैं। अर्थराइटिस यानी कि गठिया जोड़ों की सूजन और दर्द से जुड़ा हुआ रोग है। जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है तो ऐसी बीमारी होती है। यह ऐसी बीमारी है जो मुख्यत ओल्ड एज के लोगों में देखने को मिलता है। अपने देश में साठ साल से ज्यादा लगभग 80 फीसदी बुजुर्ग इस बीमारी से पीड़ित हैं। डॉक्टर नीलेश यह भी बताते हैं कि वर्क फ्रॉम होम कल्चर आने के बाद आर्थराइटिस में अप्रत्याशित रूप से तेजी देखी जा रही है। मेदांता रांची के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलेश मिश्रा यह भी कहते हैं कि अगर कुछ चीजों पर ध्यान दिया जाए तो बहुत हद तक आर्थराइटिस पर कंट्रोल किया जा सकता है। वह बताते हैं कि एक्सरसाइज और डाइट का ख्याल तो लोगों को रखना ही होगा और साथ ही साथ प्रचुर मात्रा में ताजी और हरी सब्जी का सेवन और खानपान में सीजनल फलों के उपयोग को शामिल करके अर्थराइटिस से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी आगाह किया कि जब जोड़ों में दर्द शुरू हो तो उसे हल्के में कतई न लें। डॉक्टर निलेश यह भी बताते हैं कि अक्सर यह देखा जाता है कि जब जोड़ों में दर्द होता है तो लोग हॉट वाटर बैग से उसकी सिकाई करते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। जब दर्द होता है तो बिना डॉक्टर की सलाह के लोग पेन किलर का भी इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे क्षणिक तौर पर आराम तो मिल जाता है लेकिन किडनी और इससे संबंधित अन्य बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।
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