टीम एबीएन, रांची। हेमंत सोरेन सरकार ने प्रदेश में गरीबों को पेट्रोल खरीदने पर आर्थिक सहयोग के लिए कुछ महीने पहले योजना चलाई थी, लेकिन अब इस योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इस योजना में अब लाभुकों की संख्या बढ़ने की बजाय घटती जा रही है। गरीबी रेखा में गुजर-बसर करने वाले लोगों को डर है कि अगर उन्होंने खुद के पास दोपहिया वाहन होने का प्रमाण दियो तो उन्हें गरीबी रेखा की कैटेगरी से बाहर कर दिया जायेगा। बता दें कि हेमंत सोरेन सरकार प्रदेश के लोगों को हर महीने 10 लीटर पेट्रोल खरीदने पर प्रति लीटर 25 रुपये का अनुदान देती है। सरकार की ओर से यह राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। पहले जहां 1.15 लाख लाभुकों ने इस योजना का लाभ उठाया था, वहीं अब इनकी संख्या आधी के करीब हो गई है। जब सीएम हेमंत ने इस योजना को लांच किया था तो बड़ी संख्या में लोगों ने इसका लाभ उठाया था, लेकिन बाद में इस योजना के प्रति अफवाह फैल गई कि जो लोग अनुदान प्राप्त करेंगे उनका नाम गरीबी रेखा से नीचे की सूची से काट दिया जाएगा। इस डर से लोगों ने लाभ उठाना ही बंद कर दिया है। वहीं, अब एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इस दिशा में लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाएगी। खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने इस संदर्भ में चल रही तैयारियों का हवाला देते हुए कहा कि अभी तक एक महीने में 1.15 लाख लोगों ने सब्सिडी का फायदा उठाया था, लेकिन हमारी कोशिश है कि इस रिकॉर्ड को तोड़ा जाये। खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि अधिकारियों को शीघ्र ही निर्देश दिए जाएंगे कि सभी जिलों में अभियान चलाकर लोगों को योजना के प्रति जागरूक करें और अधिक से अधिक लोगों को पेट्रोल सब्सिडी योजना का लाभ दिलाएं। डॉ उरांव ने कहा कि जरूरत पड़ने पर एक से डेढ़ माह का अभियान चलाया जा सकता है। सरकार की पहली कोशिश होगी कि पूर्व में हासिल उपलब्धि के बराबर आंकड़ा को पहुंचाया जाये और फिर इसके बाद नए सिरे से नया रिकार्ड बनाने को लेकर भरपूर प्रयास किया जायेगा। सभी जिलों में आपूर्ति पदाधिकारियों को इसके लिए लक्ष्य भी दिया जा सकता है।
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