एबीएन एडिटोरियल डेस्क (डॉ मेरी ग्रेस)। देश का अमृत काल और इस अवसर पर हर भारतीय को अपने विकास और संभावना के बारे में जानने समझने और विमर्श करने का काल। विशेषकर देश के युवाओं के लिये यह अमृत काल के 75 वें वर्ष से इसे 100 वर्ष के स्वर्णिम काल तक ले जाने का समय। इस अवसर पर मैंने अपने शिक्षण संस्थान में दो शिक्षाविद, काउंसलर मुरलीधर नंदकिशोर और योगदा सत्संग कॉलेज धुर्वा रांची के आइटी विशेषज्ञ अभिषेक कुमार को इन विषयों पर विमर्श करने के लिये आमंत्रित किया। इस अवसर पर आइटी के विशेषज्ञ अभिषेक कुमार ने बताया कि भारत सहित दुनिया के इतिहास में बीते तीन दशक इस लिहाज से खासे अहम हैं कि इसने व्यक्ति, अभिव्यक्ति और सभ्यता के साझे बूते के साथ आधुनिकीकरण की पूरी प्रक्रिया और आशय को ही बदल दिया। दिलचस्प यह कि यह सब जिस तेजी के साथ घटित हुआ उसके पीछे तकनीक की वह संजालीय ताकत है, जिसे हम इंटरनेट कहते हैं। दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले भारत में इस बदलाव का खास मतलब इसलिए है क्योंकि यहां समाज और संस्कृति का बहुलतावादी अस्तित्व पारंपरिक तौर पर कायम रहा है। हमारे विशेषज्ञ अभिषेक ने हमारी छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। इंटरनेट के ढाई दशक : उन्होंने बताया कि इसी साल अगस्त में इंटरनेट ने भारत में 25 साल पूरे कर किए हैंं। आज इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में हमारा देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है। दरअसल, बीते ढाई दशक से भारत जिस तरह डिजिटल मोड में आता गया है, उसमें बड़ी भूमिका निभाई है कंप्यूटर ने। कंप्यूटर से हमारा परिचय उदारीकरण के दौर से पहले का है। यह परिचय अपवाद से तब आम व्यवहार का हिस्सा बना जब 15 अगस्त 1995 को भारत को इंटरनेट का तोहफा मिला। विदेश संचार निगम ने देश का पहला इंटरनेट कनेक्शन दिया। 2010 तक आते-आते स्मार्टफोन की आमद ने हमारी निजी और सार्वजनिक दुनिया को एक साथ नियंत्रित करना शुरू कर दिया। आज आलम यह है कि देश में 70 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह हमारे लिए पानी या आक्सीजन की तरह जरूरी हो गया है। अगर तकनीक इस कदर हावी हो जाए कि अनुभव और अभ्यास की उसकी रचनात्मकता बड़े पैमाने पर आभासी दुनिया में तैरने लगेगी तो फिर आधुनिकता और मनुष्यता का साझा हश्र क्या होगा। हमें इंटरनेट का उपयोग ही नहीं सदुपयोग करना चाहिए। नेशनल डिजीटल लाइब्रेरी में जानकारियों का संसार भरा है इसका जमकर उपयोग करें जानकारी बढ़ाने के लिये। यह एक फ्री बेवसाइट है जो भारत सरकार द्धारा उपलब्ध कराया गया है। स्मार्ट डिवाईस का उपयोग के पहले यह जानना आवश्यक है कि स्मार्ट डिवाईस वह है जो सेंसर और इंटरनेट के माध्यम से संचालित होता है इस कारण स्मार्ट कहा जाता है। इंटरनेट सहित आइटी के माध्यम का उपयोग अपने स्कील को बढ़ाने के लिये करना चाहिए न कि इसका दुरुपयोग दूसरे मनोरजंन के लिये होना चाहिए। आज समाज को स्मार्ट व्यक्तित्व की आवश्यकता है जो युवाओं के करियर के लिये सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक आपको आइटी के बेहतर उपयोग की जानकारी होनी ही चाहिए। कुल मिलाकर पढ़ लिखे होने का अर्थ अब स्मार्ट और आइटी के जानकार के रुप में की जा रही है। बेहतरीन ज्ञान और विषयों की जानकारी के लिये इंटरनेट का प्रयोग करें जिससे आप किसी भी दूसरी समस्या से भी बच सकेंगे। साथ ही आप इंटरनेट और मोबाइल पर सुरक्षा को लेकर अति सचेत रहें। क्या आपको मालूम है कि भले आपका फोन आॅफ लेकिन आपकी बात सुन रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम ह्वाट्सअप, फेस बुक, ट्विटर, इस्टाग्राम सहित हर वेबसाइट और बैंकिग आन लाइन खरीद में आप सावधान रहें। अनजाने लिंक को भूल कर भी क्लिक न करें। सुरक्षा और सुरक्षित उपयोग विशेषकर लड़कियों के लिये बहुत ही आवाश्यक है। आज देश में हर दिन 300 से अधिक साईबर क्राईम रिकार्ड किये जा रहें हैं। चूंकि मामला वैश्विक है इसलिये अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी सक्रिय है। आजादी के अमृतकाल पर आज 5 जी भी लांच हो रहा है इस कारण हमारी गति बढ़ेंगी तो सावधानी भी बढ़ जाना चाहिए। जीवन में कोरोना काल में हम टीवी स्क्रीन, कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर देख रहे हैं, उससे जुड़ी विषयवस्तु या कंटेंट काफी मायने रखता है। मैं मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग और दुरूपयोग से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के व्यवहार को लेकर चिंतित रहती हूं। लेकिन कोरोना काल की मजबूरी ने कुछ नियमों में ढील देने को मजबूर किया। फिर भी मेरा मानना है कि शिक्षा पर एकाग्र होना और पढ़ाई के क्रम में मोबाइल सहित ई डिवाईस से दूर रहना सफलता के लिये जरूरी है। 50 लाख से ज्यादा वेब ठिकाने : आज दुनिया में जिन बड़ी कंपनियों का बोलबाला है इंटरनेट के बिना उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। गूगल, अमेजॉन, फेसबुक, नेटफ्लिक्स, पेटीएम जैसी सैकड़ों कंपनियों का पूरा कारोबार ही इंटरनेट पर खड़ा है। भारत में इंटरनेट पर नजर डालें तो 2005 तक देश में 6500 रजिस्टर्ड वेबसाइट थीं। आज कुल रजिस्टर्ड वेबसाइट की संख्या 50 लाख से ज्यादा हैं। निश्चित तौर पर आइटी का क्षेत्र से अधिकतम लाभ है तो अधिकतम सावधानी की भी आवश्यकता है। आजादी के अमृत काल पर हम शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में आइटी के उपयोग को स्वीकारते हैं लेकिन इसके बेहतर उपयोग और शैक्षणिक विकास के लिये इसके संतुलित उपयोग पर भी जोर देते हैं। हम प्रतिबद्ध है देश के 100 वें साल में देश को विकसित और सुरक्षित राष्ट्र बनाने के लिये। विशेषज्ञों के प्रति हमारा आभार और विशेष कार्यक्रम की निरंतरता के लिये धन्यवाद। (लेखिका उर्सूलाइन इंटर कॉलेज, रांची की प्रिसिंपल हैं।)
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