टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने बुधवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन पर झारखंड में उनके कार्यकाल के दौरान फरवरी 2019 में ही प्रतिबंध लगा दिया गया था। दास ने एक ट्वीट में कहा, मैं देश विरोधी गतिविधियों में शामिल पीएफआई एवं उससे संबद्ध कईं अन्य संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं। मैं इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हार्दिक बधाई देता हूं। गौरतलब है कि पीएफआई को झारखंड में फरवरी, 2019 में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1908 की धारा-16 के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार पर पीएफआई गतिविधियों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए दास ने कहा, पिछले दो साल से जामताड़ा सहित जिलों के लगभग 100 अल्पसंख्यक बहुल प्राथमिक विद्यालयों में रविवार के बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के पीछे संगठन का हाथ है। उन्होंने कहा कि जब तक भाजपा ने देश में इस मुद्दे को नहीं उठाया तब तक सरकार इससे अनजान थी। वहीं, दास ने इस साल की शुरुआत में रामनवमी त्योहार के आसपास लोहरदगा और रांची में हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए भी पीएफआई को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने दंगों में प्रतिबंधित संगठन की संलिप्तता की जांच की भी मांग की थी। दास की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो के प्रवक्ता मोहन करमाकर ने आरोप लगाया कि भाजपा समाज में दरार पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा भाजपा हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झामुमो गठबंधन की कल्याणकारी पहलों को हज़म नहीं कर पा रही है, इसलिए लोगों में भ्रम पैदा कर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। बता दें कि केंद्र सरकार ने कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों में लिप्त पीएफआई और इससे जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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