राजू श्रीवास्तव जैसे कलाकार कभी मरते नहीं...

 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। बात उन दिनों की है जब गीत, डायलॉग आदि सुनने के लिए टेपरिकॉर्डर पर कैसेट चलते थे। मेरे पास एक टेपरिकॉर्डर था और नए कैसेट खरीदने का शौक था। एक दिन जब मैं कुछ नये कैसेट खरीदने दुकान पर गया तो वहाँ टेपरिकॉर्डर पर फ़िल्मी कलाकारों की आवाज में कुछ डायलॉग वाला कैसेट प्ले हो रहा था। अशोक कुमार की आवाज में #चलो_झुमरीतिलैया....सुनाई दिया। मैंने दुकानदार से पूछा- अंकल, यह कौन सा कैसेट आया है, जिसमें हमारे शहर का नाम है? उन्होंने कहा- पूरा सुनो। फिर आवाज आई- तुमलोग मुझे वहां ढूंढ रहे हो और मैं तुम्हारा यहां इंतजार कर रहा हूं। अमिताभ की आवाज में दीवार का संवाद सुनकर मैं दंग रह गया। चूंकि अमिताभ की दीवानगी सर चढ़कर बोलती थी और एकदम हूबहू आवाज सुना तो चकित रह गया। दुकानदार ने कहा- ये राजू श्रीवास्तव हैं, किसी भी हीरो की आवाज निकाल लेते हैं। मैंने कैसेट खरीद ली और लगातार सुनता रहता था। फिर आया ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेन्ज। सिद्धू और शेखर सुमन के सामने राजू जी की कॉमेडी देखी। उनकी एक कॉमेडी शेयर करना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि मान लीजिए आज से सौ दो सौ साल बाद जब धरती की खुदाई होगी तो आज की उपयोग वाली चीजें मिलेंगी। तब केवल सीडी मिलेंगे। लोग आपस में बात करेंगे, यह क्या है भाई? तो पुरातत्व वाले कहेंगे, यह उस ज़माने की थाली थी, लोग इसी में खाते थे। तब बाकी लोग पूछेंगे, इसके बीच में छेद क्यों है? तो पुरातत्व का अधिकारी बतायेगा कि उस समय का आदमी ऐसा ही था, जिस थाली में खाता था, उसी में छेद करता था। एक हास्य कलाकार की इतनी शानदार सोच के साथ हंसाने की अदा ने मुझे उनका मुरीद बना दिया। फिर मुझे उनकी स्टैंडअप कॉमेडी देखने का नशा छा गया। चाहे वह शोले के विभिन वर्जन की कॉमेडी हो, राजनेताओं की मिमिक्री हो या विवाह के दृश्य पर मस्ती या फिर बुफे पर उनकी कल्पनाशीलता। वे मेरी दिनचर्या में शामिल हो गये। जब यूट्यूब का दौर आया तो फिर कहना क्या, रोज उनकी एक कॉमेडी देखकर चार्ज होना आदत- सी हो गई। मैं देखता था, वे जब भी माइक पकड़ते, उनके हाथ कांपते थे। मैं कहता था, शायद कुछ कमजोर हो गये हैं। मगर यह नहीं जानता था, कमजोर वे नहीं, हम थे। क्योंकि उनकी नई कॉमेडी की हंसी के बिना रहना मुश्किल लग रहा है। पिछले डेढ़ महीने तक जब वे कोमा में रहे, कभी नहीं लगा रिकवर नहीं होंगे। कल दिनभर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती रही, मैं हिम्मत न जुटा पाया कुछ लिखने का। अटैच था उनसे। कल से आज तक मैंने अमिताभ का ट्वीट ढूंढा, मुझे मिला नहीं। पीएम सहित कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, अमिताभ का नहीं दिखा। हालांकि राजू जी हमारी रिप से बहुत ऊपर थे, मगर जिनकी नकल करके वे ख्यात हुए, उनकी श्रद्धांजलि तो बनती ही है। अफ़सोस कहीं दिखा नहीं। राजू जी एक कलाकार ही नहीं, हम सबके जीवन के खास अंग थे क्योंकि गमों पर उनकी कॉमेडी की गुदगुदाहट कैप्सूल का काम करती थी। हम उन्हें कोरम पूरा करने के लिए भावुक होकर श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे हैं, मगर सच यह है कि राजू कभी मरा नहीं करते। नमन राजू भाई, आपकी हंसी के सत्य का प्रकाश सदैव फैला रहेगा। (साभार : मनोहर रुद्र पांडेय के फेसबुक वॉल से)

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