कोरोना के इलाज में दो एंटीबॉडी दवाओं पर लगायी गयी रोक

 

एबीएन हेल्थ डेस्क। देश-दुनिया में जारी कोरोना वायरस संक्रमण के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीबॉडी दवा की सिफारिश पर नया अपडेट जारी किया है। डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के मरीजों के लिए जिन दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाओं को असरदार माना था। अब उसके प्रयोग को लेकर नई सलाह दी है। नई गाइडलाइन में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना मरीजों के लिए दो एंटीबॉडी दवाओं सोट्रोविमैब और कासिरिविमैब इमडिविमैब का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा है। ये दोनों दवाएं वर्तमान में ओमिक्रॉन जैसे वैरिएंट के खिलाफ अप्रभावी हो सकती है। हालांकि भारत के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, अच्छा हुआ कि डब्ल्यूएचओ ने औपचारिक रूप से अपनी सिफारिशों वाले दिशानिदेर्शों को अपडेट कर दिया है। क्योंकि इसके लिए पर्याप्त सबूत थे कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी अब काम नहीं करेंगे। कुछ प्रमुख भारतीय शहरों में केवल चुनिंदा रोगियों पर ही इस एंटीबॉडी दवा का उपयोग किया गया है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल कोरोना के कुछ मरीजों के लिए दो एंटीबॉडी वाली इन दोनों दवाओं की सिफारिश की थी। ये सोट्रोविमैब और कासिरिविमैब इमडिविमैब नामक दो एंटीबॉडी दवाएं थीं। लेकिन अब डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन डेवलपमेंट ग्रुप आॅफ इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स द्वारा किए गए रिव्यू ने दो एंटीबॉडी दवा के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इस रिव्यू को हाल ही में पीयर रिव्यू जर्नल द बीएमजे में प्रकाशित भी किया गया था। विशेषज्ञों कहना है, क्लिनिकल ट्रायल्स में यह पाया गया कि एंटीबॉडी दवा सोट्रोविमैब और कासिरिविमैब-इमडिविमैब ने सार्स कोव-2 और उसके अलग-अलग वैरिएंट की न्यूट्रलाइजेशन गतिविधि को सार्थक रूप से कम कर दिया है। यानी कोरोना के वैरिएंट को मारने में ये दोनों दवाएं उतनी कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं और पैनल के बीच इस बात पर सहमति थी इन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाओं की क्लिनिकल प्रभावशीलता कम है। ये दोनों दवाएं सार्स कोव-2 स्पाइक प्रोटीन से जुड़कर काम करती हैं। जिससे कोशिकाओं को संक्रमित करने की वायरस की क्षमता बेअसर हो जाती है। एक्सपर्ट्स की रिसर्च के मुताबिक, सभी टेस्ट और सबूतों को परखने के बाद पैनल ने फैसला किया कि लगभग सभी रोगियों को सोट्रोविमैब या कासिरिविमैब इमडिविमैब दवा नहीं लेनी चाहिए। कोविड के रोगियों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा कासिरोवा मैब इमडिविमैब के उपयोग के खिलाफ एक मजबूत सिफारिश करते हुए एक्सपर्ट्स ने इन विट्रो (लैब आधारित) न्यूट्रलाइजेशन डाटा पर विचार किया।

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