रिम एबीएन, रांची। फाइलेरिया एक ऐसी चुनौती है, जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर वैश्विक कल्याण में बाधा डालती है। इस चुनौती से निबटने के लिए सभी सहयोगियों को मिलकर काम करना होगा। सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है कि राज्य में फाइलेरिया और कालाजार के मरीजों की संख्या में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है। इसमें मीडिया की भूमिका सबसे अहम है। उक्त बातें स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरूण कुमार सिंह ने होटल बीएनआर चाणक्य में मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत मीडिया कार्यशाला में कही। श्री अरूण कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में वर्ष 2020-2021 के आकड़ों के अनुसार लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) के लगभग 43,985 और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के लगभग 44,620 मरीज हैं। जिसमें 38,376 मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है इसके साथ ही 16 सितम्बर से 30 सितम्बर तक झारखण्ड के 8 फाइलेरिया प्रभावित जिले लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह, गढ़वा, खूंटी एवं हजारीबाग में फाइलेरिया से मुक्ति के लिए 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को उम्र के अनुसार डीईसी और अलबेंडाजोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा बूथ एवं घर-घर जाकर अपने सामने मुफ्त खिलाई जायेगी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि एम.डी.ए. कार्यक्रम के दौरान सभी गतिविधियां सही रूप से सम्पादित हों। साथ ही मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान फाइलेरियारोधी दवाओं का वितरण कदापि नहीं होगा और प्राशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही लाभार्थियों को दवा का सेवन सुनिश्चित किया जायेगा। राज्य से लेकर जिला स्तर तक समन्वय बनाकर कार्यक्रम के दौरान आनेवाली किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए विभाग तत्पर रहेगा। मीडिया सहयोगियों से आग्रह है कि वे इन रोगों के उन्मूलन में अपने संकल्प को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए एक साथ आए और जागरूकता बढ़ाने में मदद करें, ताकि लोग इन दवाओं के महत्व को समझते हुए इन्हें स्वीकार करें। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर जो समितियां हैं, उन्हें एक्टिव किया जाएगा। समितियां जनजागरूकता के साथ कूड़े- कचरे पर अंकुश लगाएं और साफ -सफाई का ध्यान रखें। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए अगले दो वर्ष महत्वपूर्ण - छवि पंत जोशी- भारत सरकार के प्रतिनिधि श्री छवि पंत जोशी ने कहा कि किसी भी बीमारी को हराने का एकमात्र तरीका सामुदायिक जुड़ाव और जनसहभागिता है। यह तभी संभव है, जब इस बीमारी के बारे में हर स्तर पर सही और पूरी जानकारी पहुंचे। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वह सभी रोगों के उन्मूलन की दिशा में अपने संकल्प को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता को बरकरार रखें। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए अगले दो वर्ष काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 2030 की डेडलाइन भारत सरकार की है और हमारे पास 2026 तक का समय है। 2026 के बाद सर्वे का काम होगा, जो चार वर्षों तक चलेगा। अगर हम 65 प्रतिशत तक सफलता हासिल कर लेते हैं, तो संक्रमण को नियंत्रित करने में सफल हो सकेंगे। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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