एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति ने कैंसर को देश में अधिसूचित बीमारी घोषित करने की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सोमवार को सौंपी गई। समिति ने कहा है कि कैंसर को अब भी अधिसूचित बीमारी घोषित नहीं किया गया है, इस कारण इससे होने वाली मौतों की गणना सही ढंग से नहीं हो रही है। कैंसर केयर प्लान एंड मैनेजमेंट, प्रिवेंशन, डायग्नोसिस रिसर्च एंड अफोर्डेबिलिटी ऑफ कैंसर ट्रीटमेंट पर 139 वीं रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं। समिति ने पाया कि कैंसर को अभी भी एक अधिसूचित बीमारी घोषित नहीं किए जाने से इससे होने वाली मौतों की कम रिपोर्टिंग होती है। समिति ने कहा कि कैंसर से मौतों के आंकड़ों में स्पष्टता नहीं होती। अधिसूचित बीमारी नहीं होने से इसके डेटा संग्रह में बड़ी बाधा आती है। इस समस्या को सरकार के ध्यान में लाया गया है। समिति का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का उल्लेख किए बिना कई बार मृत्यु की वजह केवल कार्डियो-श्वसन तंत्र फेल होना बताया जाता है। समिति ने सरकार को राय दी है कि अस्पतालों में कैंसर से मौतों के प्रामाणिक आंकड़े दर्ज होने से इस रोग की देश में सही स्थिति पता चल सकेगी। इन आंकड़ों से कैंसर रोग, निदान व निगरानी में भी सहायता होगी। समिति ने टीएमसी की इस राय से सहमति जताई कि कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित कर अस्पतालों को उससे होने वाली मौतों को अनिवार्य रूप से दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। सपा सांसद रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली समिति ने कैंसर रोगियों का रियल टाइम रिकॉर्ड रखने के लिए कोविन जैसा पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया। इससे कैंसर रोगियों के इलाज के काम होने वाले टूल्स व अन्य संसाधनों की जानकारी भी दी जा सकेगी।
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