यक्ष्मा से मुक्ति में कारगर साबित हो रही सरकारी योजनाएं

 

टीम एबीएन, विष्णुगढ़/हजारीबाग (शैलेन्द्र)। देश को यक्ष्मा मुक्त करने के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने शुक्रवार को 2.0 एक प्रोग्राम लॉन्च किया है। जिसमें 2025 तक यक्ष्मा यानी टीवी मुक्त भारत बनाने पर जोर दिया गया है, तो वहीं झारखंड सरकार ने भी झारखंड से यक्ष्मामुक्त करने के लिए 2024 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी आलोक में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी और बिष्णुगढ़ प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और उनकी टीम ने प्रखंड प्रक्षेत्र से टीवी मुक्त करने के लिए हर कोशिश पर जोर-शोर से लगी है। जानकारी के अनुसार सरकार के टीवी मुक्त करने के क्षेत्र में विधायकों को भी आगे आने और अपने क्षेत्र के किसी प्रखंड या एक इलाके को अडॉप्ट करने और मरीजों को न्यूट्रिशन आदि प्रोवाइड करने की और कदम बढ़ाने को कहा है। उपरोक्त बातों की जानकारी प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिष्णुगढ़ के यक्ष्मा विभाग के सुपरवाइजर सुभम ने बताया। ताजा जानकारी के अनुसार बिष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत यक्ष्मा रोगियों का एक आंकड़ा बताता है कि प्रत्येक वर्ष यहां 120 से 130 मरीज इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं। यानी 2018 से 2022 तक के कुल आंकड़े पर नजर डाला जाय तो बिष्णुगढ़ प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच वर्षो के दौरान औसतन पांच सौ से 600 टीबी मरीजों का इलाज यहां किया जाता है और चल रहा है, जो प्रत्येक वर्ष औसतन 30 से 40 टीबी मरीज बिल्कुल ठीक हो कर घर जाते है। बाकी अन्य के बारे में बताया जाता है कि कुछ ऐसे भी पेसेंट है जो बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या इलाज के दौरान धूम्रपान नशा का सेवन करते है। वैसे लोगों के लिए बीमारी ठीक नहीं हो पाती है। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ अरुण कुमार ने बताया कि हमारी टीम और एक अन्य संस्था द्वारा समय समय पर रोगी के घर विजिट करती है, ताकि रोगियों के रहन सहन खान पान के न्यूट्रिशन की जांच करती है। कहा कि रोगियों को केंद्र में निःशुल्क जांच और इलाज के साथ ठीक होने तक प्रतिमाह पांच सौ रुपये चिकित्सा सहायता के लिए दी जाती है। टीबी के लक्षण और प्रकार : टीबी तो कई प्रकार के हैं। पहला डीएस और दूसरा डीआर। डीएस के भी दो पार्ट है प्राइमरी और एक्स्ट्रा। प्राइमरी छाती और एक्स्ट्रा प्राइमरी में नाख़ून और बाल छोड़ कर कोई भी भाग में हो सकता है। वहीं डीआर थोड़ी रैसिस्ट है। प्रखंड क्षेत्र में ज्यादा तर डीएस टीबी के मरीज अधिक है। वहीं लक्षण के बारे में बताया जाता है कि बुलगम से ब्लड आना, अधिक दिनों तक खासी होना बेसिक सिम्पटन है। मरीजों के खासने और छींकने के बाद जो बैक्टीरिया निकलता है उससे बीमारियां होती है। बिष्णुगढ़ प्रखंड में नवंबर 2022 में तक़रीबन 20 से 25 मरीजों को इलाज का इलाज कम्पलीट किया गया है जिसमें ताजा रिपोर्ट में इतवरिया मोसोमात खरकी पंचायत के डुमरिया की रहने वाली यक्ष्मा मरीज आपबीती बताती है कि मैं अपनी जिंदगी से हार चुकी थी, लेकिन बिष्णुगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने मुझे नई जिंदगी दी है। इतवारिया के अलावे लक्ष्मी कुमारी, सोमर सोरेन, लखन रविदास, नकुल करमाली, बेबी देवी, रोहित सोरेन के अलावे कईयों ने टीबी मुक्त हुए है। चिकित्सा पदाधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि हमारा और हमारी टीम का प्रयास है कि इसपर और अधिक जोर दिया जा सके, ताकि अधिक से अधिक रोगियों को टीवीमुक्त किया जा सके और बिष्णुगढ़ प्रखंड क्षेत्र टीवी मुक्त करने में सफल हो सके।

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