एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कम होती कीमत के बीच भी पेट्रोल-डीजल के रेट पुराने स्तर पर ही कायम हैं। तेल की कीमत से जनता को राहत देने के लिए पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार अब हर 15 दिन में कच्चा तेल, डीजल-पेट्रोल और विमान ईंधन पर लगाए गए नए टैक्स की समीक्षा करेगी। अंतरराष्ट्रीय कीमत को ध्यान में रखते हुए करों की समीक्षा हर पखवाड़े की जायेगी। इसके बाद पिछले दिनों केंद्र सरकार ने डीजल और विमानन ईंधन पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स बढ़ाने का फैसला किया था। इसके अलावा सरकार ने घरेलू क्रूड आॅयल पर भी टैक्स बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस बदलाव को 1 सितंबर से लागू भी कर दिया गया है। यह निर्णय सरकार की तरफ से क्रूड की बेलगाम होती कीमत के बीच लिया गया था। हालांकि फिलहाल क्रूड 7 महीने के निचले स्तर पर चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा, हम निर्यात को हतोत्साहित नहीं करना चाहते लेकिन घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ाना चाहते हैं। यदि तेल की उपलब्धता नहीं होगी और निर्यात अप्रत्याशित लाभ के साथ होता रहेगा तो कुछ हिस्सा देशवासियों के लिए भी रखना जरूरी है। घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का कर लगाया गया है। राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा कि नया कर सेज इकाइयों पर भी लागू होगा। लेकिन उनके निर्यात को लेकर पाबंदी नहीं होगी। इसके साथ ही रुपये की गिरावट पर वित्त मंत्री ने कहा आरबीआई और सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। सरकार आयात पर रुपये के मूल्य के असर को लेकर पूरी तरह सचेत है।
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