टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। घाटशिला स्थित विभूति स्मृति संसद बांग्ला के सुप्रसिद्ध कथाकार विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के नाम पर स्थापित एक सांस्कृतिक केंद्र है। इस वर्ष विभूति भूषण की 128वीं जयंती पर संस्था ने इस वर्ष से विविध साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए विविध भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करने के निमित्त सुबर्नशिला सम्मान की शुरुआत की है। यह प्रथम सुबर्नशिला सम्मान है। यह हिंदी भाषा में देश के महत्वपूर्ण समकालीन हस्ताक्षर रणेंद्र जी को, जिनके ग्लोबल गांव के देवता, गायब होता देश, गूंगी रुलाई का कोरस जैसे महत्वपूर्ण उपन्यास समकालीन हिंदी कथा साहित्य में अपनी भाषा, विषय और विजन के लिए रेखांकित किये गए हैं, दिया जा रहा है। साथ ही बंगला भाषा के दो अन्य कथाकारों निसार आमीन और अजीत त्रिवेदी को भी इस वर्ष का सुबर्नशिला सम्मान दिया जायेगा। इस साहित्यिक आयोजन में विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के साहित्य पर विमर्श सत्र आमार चोखे बिभूति भूषण आर झारखंडे बांग्ला भाषार दोशा भी आयोजित है। विभूति भूषण के साहित्य पर वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप कोलकाता से वरिष्ठ इप्टाकर्मी मित्रा सेन मजूमदार शामिल हो रही हैं। रणेंद्र जी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भी होंगे। विभूति भूषण जयंती 12 सितंबर, 2022 को घाटशिला में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम सह सम्मान समारोह में स्थानीय प्रलेस और इप्टा के साथी भी सहयोगी की भूमिका में हैं। विभूति भूषण जयंती पर सुबह पुस्तकालय और विभूति भूषण बंद्योपाध्याय पर केंद्रित आर्ट गैलरी का उद्घाटन और शाम को चंद्रिमा चटर्जी के द्वारा प्रशिक्षित बाल और युवा कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां और नाटक महंगा सौदा (प्रेमचंद अनुदित टॉलस्टॉय की कहानी के नाट्य रूपांतरण) पेश किया जायेगा। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों, रंगकर्मियों और गणमान्य व्यक्तियों शामिल होंगे। यह जानकारी विभूति स्मृति संसद घाटशिला के सुशांत सीट (जो कार्यक्रम संयोजक हैं) ने दी है।
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