करम पर्व के बहाने पूर्वजों ने हमें परंपरा, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े रहना सिखाया : हेमंत सोरेन

 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह बहुत खुशी और गर्व का विषय है कि हम अपनी परंपरा-संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यहां महादेव टोली, लोअर चुटिया में आयोजित करम महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक पर्व करम के मौके पर आज हम सभी लोग एकत्रित हुए हैं। धरती पर आदि समाज की अपनी परंपरा और संस्कृति रही है। इस विकासशील दौर में हमें अपनी परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को बचा पाना चुनौती है लेकिन इन सभी चुनौतियों से निकलते हुए आज हमारी युवा पीढ़ी आदिवासी-मूलवासी के परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। आज गली-मोहल्ले,घरों सहित कई अखाड़ों में करम पूजा महोत्सव आयोजित हुआ है। पिछले 2 सालों से हम सभी लोग वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को लेकर करम महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से नहीं कर पा रहे थे परंतु अब जैसे ही परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य हुई हैं, आज फिर हम प्रकृति पर्व करमा पूजा का भव्य आयोजन कर पा रहे हैं तथा आपस में प्रेम, स्नेह और खुशियां बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन धर्म गुरुओं की बात तथा परंपरा, संस्कृति एवं सभ्यता की बात सुनने और मानने का दिन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बड़ी संख्या में हमारी बहनें व्रत रखते हुए पूजा कार्यक्रम में शामिल हो रही हैं। हम सभी लोग इस पावन बेला का गवाह बने हैं। आज का दिन सभी के बीच खुशियां बांटने वाला दिन है। प्रकृति पर्व करम पूजा के प्रति यह उत्साह यह बताता है कि हम सभी लोगों का प्रकृति से कितना प्रेम करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भी हम सभी लोग मिलजुल कर अपनी संस्कृति को इसी तरह आगे बढ़ाने का काम करेंगे। सोरेन ने कहा कि हम सभी के लिए गौरव की बात है कि हम समाज के वह पीढ़ी हैं जहां हमारे पूर्वजों ने हमें प्रकृति से प्रेम करना, प्रकृति से जुड़े और बंधे रहना सिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से जूझ रहा है। पर्यावरण संतुलन विषय पर बड़ी-बड़ी गोष्ठियां आयोजित हो रही हैं। इन गोष्ठियों में पर्यावरण संतुलन और संरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चाएं हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में कई कारणों से प्राकृतिक व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप हो रहा है। आने वाले दिनों में अगर प्राकृतिक के साथ ताल-मेल में गड़बड़ी होता रहा तो यह मनुष्य जीवन के लिए भयावह साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के प्रति एकजुट रखने का काम किया है। आने वाले समय में भी हम अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर चलते हुए परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम करेंगे ऐसा मुझे पूरा विश्वास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे हम इस आधुनिक युग में विकास की ऊंचाइयों को कितना भी क्यों न छू लें लेकिन हमारी नींव जमीन ही है।

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