शिक्षक दिवस : प्रेस क्लब ने 10 वरिष्ठ पत्रकारों को किया सम्मानित

 

टीम एबीएन, रांची। शिक्षक दिवस के दूसरे दिन छह सितंबर को द रांची प्रेस क्लब द्वारा पहली बार गुरु सम्मान समारोह का आयोजन प्रेस क्लब में किया गया। इस सम्मान समारोह की शुरुआत भविष्य में इस परंपरा को और भी प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है। मुख्य रूप दस वरिष्ठ पत्रकारों व फोटो जर्नालिस्टों का चयन किया गया, जिनमें पद्मश्री बलबीर दत्त, डॉ ऋता शुक्ल, बैजनाथ मिश्र, वॉल्टर भेंगरा, मधुकर, खुर्शीद परवेज़ सिद्दीकी, प्रो वीपी शरण और फोटो जर्नलिस्ट अशोक कर्ण, दिवाकर मानिक बोस शामिल थे। कार्यक्रम के मौके पर डॉ ऋता शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र, वॉल्टर भेंगरा, मधुकर, उर्दू पत्रकारिता के वरिष्ठ पत्रकार खुर्शीद परवेज़ एंव फोटो जर्नलिस्ट अशोक कर्ण, दिवाकर, मानिक बोस उपस्थित थे, जिन्हें जेडा पौधा, शॉल ओढ़ाकर व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। मौके पर यह पत्रकारों ने संबोधित करते हुए डॉक्टर ऋता शुक्ल ने कहा कि मेरे दादा जी पत्रकार थे, लेकिन पिताजी नहीं चाहते थे कि बेटी पत्रकारिता में आये, लेकिन अंतिम समय में आना हुआ। आज ना सिर्फ रांची, झारखंड बल्कि दूसरे प्रदेशों एवं विदेशों में भी हमारे छात्र छात्राएं हैं जो पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत बेहतर काम कर रहें हैं। वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने कहा कि गुरु शिष्य की परंपरा हमारे यहां बहुत पुरानी है और आज भी चल रही है और आगे भी चलती रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता चौथा स्तंभ है और आज चारों स्तंभ कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका, पत्रकारिता सभी आज जेल में बंद है। ये समय हंसने की नहीं बल्कि गंभीरता से सोचने की है। वहीं वॉल्टर भेंगरा ने कहा कि यादें तो बहुत है, लेकिन बता दूं कि मैं पहला आदिवासी पत्रकार हूं आज तक काम कर रहा हूं। सबसे बड़ी बात ये है कि मैं जब नौवीं कक्षा में था, तभी हमारी खबर दिल्ली के एक अखबार में प्रकाशित हुई थी। जब मेरे साथी एचईसी, मेकॉन जैसी कंपनियों में काम के लिए जा रहे थे और उस दौर में मैंने पत्रकारिता को चूना। उन्होंने बताया कि फिल्म अभिनेत्री स्मिता पाटिल की मृत्यु की खबर मेरे ही लिखे हुए उदितवाणी अखबार में प्रकाशित हुई थी। वहीं वरिष्ठ पत्रकार मधुकर ने कहा कि आज हम बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पत्रकारिता संपूर्ण विपक्ष होनी चाहिए। सरकार को नियंत्रित करने के लिए हमें काम करना चाहिए। पत्रकार को कभी पार्टी नहीं बनना चाहिए, निष्पक्ष होना चाहिए। मैंने हमेशा विपक्ष बीट का ही रिपोर्टिंग किया हूं। उस दौर में जब कम्युनिस्ट पार्टी हाशिये पर पहुंच गई थी, तो मैंने उनकी खबरें लिखने की शुरुआत किया। उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार खुर्शीद परवेज ने कहा कि सारा प्रशंसा ईश्वर की, जिसने ये सारी सृष्टि की रचना की है। आज इस उम्र में हाथ नहीं चल रहा है, लेकिन दिमाग चल रहा है, इसी के बल पर लिख रहे हैं, लिखते लिखते मरेंगे ऐसा मेरा विश्वास है। वक्त भी गुजर जायेगा, रात का अंधेरा भी खत्म हो जायेगा, और सूरज जरूर निकलेगा, उम्मीद कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट हथकड़ी है। गवाह जेल है, जो बचा सब कातिल हैं। ज्योडिशयली और जर्नलिस्ट जिस दिन एक हो गए तो समझो उस दिन पत्रकारिता की मौत हो गई। मौके पर वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट मानिक बोस ने कहा कि हम लोग उस जमाने से फोटो जर्नलिज्म की शुरुआत की जब संसाधनों की कमी थी, आज बहुत सारी सुविधाएं हैं। जरूरत है तो बेहतर करने की। इनके अलावा फोटोजर्नलिस्ट अशोक कर्ण, दिवाकर प्रसाद ने भी अपनी बातों को रखा। मौके पर द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजय मिश्र ने स्वागत भाषण में कहा आज का दिन ऐतिहासिक है, आगे भी हम इस तरह के कार्यक्रम करेंगे। भाषा की सुधार पर भी कार्यशाला आयोजित करेंगे। मौके पर पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह एवं कोषाध्यक्ष सुशील सिंह मंटू, उपाध्यक्ष पिंटू दुबे, संयुक्त सचिव अभिषेक सिन्हा, कार्यकारिणी सदस्य रूपम, मानिक बॉस, संजय रंजन, धर्मेंद्र गिरी, परवेज कुरैशी, राकेश कुमार, राज वर्मा सहित भारत भूषण टुन्नू, कुबेर सिंह, चंदन, अभिषेक रॉय, गुलाम शाहिद, इकबाल शबा, एहसान उल हसन, आदिल रशीद, आशिफ, अशफर, नसीम, परवाज खान, अक्षय, सुनील पोद्दार सहित कई पत्रकारगण उपस्थित थे। मंच संचालन पत्रकार निलय सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह ने किया।

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