ब्रितानी जनता में गुस्सा : कंज़र्वेटिव पार्टी में विभाजन- बहुत कठिन है डगर लिज़ ट्रस की

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लिज़ ट्रस ब्रिटेन की नई प्रधान मंत्री चुन ली गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के चुनाव में भारतीय मूल के ऋषि सुनाक को 47 के मुक़ाबले 53 फीसदी वोटों से हराया। ट्रस की जीत उतनी धमाकेदार नहीं रही, जैसी सारे ब्रिटेन में मानी जा रही थी। इसे सुनाक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जायेगा क्योंकि वे ब्रिटेन के नागरिक तो हैं, लेकिन उनका मूल भारतीय है। ब्रितानी राजनीतिज्ञों और विश्लेषकों का एक तबका प्रधानमंत्री के पद के लिए सुनाक को ट्रस से ज़्यादा बेहतर मान रहा था। ट्रस की जीत का मामूली 6 फीसदी का अंतर इस बात की तस्दीक करता है कि भारतीय हिन्दू मूल का एक राजनीतिज्ञ प्रधानमंत्री पद की दौड़ में इतनी आगे तक गया, क्योंकि कंज़र्वेटिव पार्टी को अत्यंत रूढ़िवादी माना जाता है। समर्थकों को लिज ट्रस से उम्मीदें एक बात और ट्रस की जीत का छोटा अंतर साफ करता है कि सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी में देश के नेतृत्व को लेकर गंभीर विभाजन है। पिछले प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कैबिनेट में सुनाक वित्त मंत्री थे और ट्रस विदेश मंत्री। इस वक़्त ब्रिटेन में एनर्जी यानी ऊर्जा के दाम को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। अब लिज़ ट्रस के समर्थकों को उम्मीद है कि गुरुवार को ही नव निर्वाचित प्रधानमंत्री ऊर्जा की कीमत पर फ्रीज़ लगा देंगी, जिसका वादा उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान किया था। ट्रस ने और भी कई वायदे किये हैं। उनकी सरकार कोई भी नया टैक्स नहीं लगायेगी। ट्रस अपने चुनाव प्रचार के दौरान वित्तमंत्री के रूप में सुनाक द्वारा घोषित किये गए नए टैक्स प्रस्तावों को भी वापस लेने का ऐलान कर चुकीं हैं। इनमें साल 2023 में कॉर्पोरेट टैक्स को 19% से बढ़ा कर 25% करना और नैशनल इंश्योरेंस में 1.25% की बढ़ोतरी शामिल है। सुनाक ने ये प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं और लोक कल्याण कार्यक्रम के लिए अतिरिक्त धन जुटाने के लिए किये थे। ट्रस का एक और महत्वपूर्ण ऐलान है ब्रिटेन के राष्ट्र्रीय बैंक – बैंक ऑफ इंग्लैंड के अधिकारों को, बिना उसकी स्वायत्तता प्रभवित किये, फिर से परिभाषित करना। अगर ट्रस ऐसा करती हैं तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा और इस पर बवाल भी खूब मचेगा, क्योंकि आज तक ऐसा दुस्साहस किसी और प्रधानमंत्री ने नहीं किया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियों में शामिल है देश की अर्थव्यवस्था के लिए ब्याज की दर तय करना। रूस और चीन नीति में उचित बदलाव करेगा ब्रिटेन : सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में ट्रस द्वारा किये गए वायदों में प्रमुख हैं रक्षा व्यय में साल 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद का 3% ब्रिटेन की रक्षा तैयारियों पर खर्च करना। अभी यह 2.3% है। बोरिस जॉनसन के समय से रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन को ब्रिटेन द्वारा दी जा रही मदद ट्रस सरकार में भी जारी रहेगी। बल्कि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए तैयार किये जा रहे आर्थिक प्लान में ब्रिटेन अग्रणी भूमिका निभायेगा। ट्रस के अनुसार वर्तमान माहौल को देखते हुए ब्रिटेन अपनी रूस और चीन नीति में उचित बदलाव करेगा और चीन से आर्थिक संबंधों पर अंकुश लगाने से हो सकने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कॉमनवेल्थ देशों से दोतरफ़ा व्यापारिक समझौते करेगा। यूरोपीय संघ के साथ अभी भी मौजूद सभी संबंधों को साल 2023 तक ख़त्म करने के लिए भी ट्रस सरकार सभी ज़रूरी कदम उठायेगी। साथ ही कई समृद्ध पश्चिमी यूरोपीय देशों के विपरीत ब्रिटेन अपने यहां अप्रवासियों के आगमन की कोई निर्दिष्ट सीमा स्वीकार नहीं करेगा। साफ़ है लिज़ ट्रस खुद को कंज़र्वेटिव विचारधारा की झंडाबरदार की तरह स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। मौजूद गंभीर विभाजन को पाटना ट्रस के लिए सबसे जरूरी : टैक्सों में छूट, ब्रितानी धनाढ्य वर्ग के लिए मुफीद टैक्स प्रणाली, यूरोपीय संघ को पूरी तरह नमस्ते और आप्रवासियों के लिए किसी प्रकार के कोटे को ना कहना, ये सभी कंज़र्वेटिव पार्टी के अति दक्षिणपंथी समर्थकों को ज़रूर भाएंगे, लेकिन ऐसा कर ट्रस ब्रिटेन को पूरी तरह अमेरीका का पिछलग्गू और यूरोपीय व्यवस्था से अलग देश बना देंगीम लेकिन ऐसा तब हो पाएगा जब ट्रस अभी कंजर्वेटिव पार्टी में मौजूद गंभीर विभाजन को पाट पायें।

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