केंद्रीय एजेंसी अधिग्रहित, उपलब्ध करायी गयी जमीन का म्यूटेशन जरूर करायें : उपायुक्त

 

टीम एबीएन, रांची। रांची उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आज दिनांक 17 अगस्त 2022 को भू-राजस्व तथा भू-अर्जन से संबंधित बैठक आयोजित की गई। समाहरणालय ब्लॉक ए स्थित उपायुक्त सभागार में आयोजित बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमण्डल पदाधिकारी बुंडू, एलआरडीसी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, एनएचआई के पदाधिकारी, विशेष विनियमन पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में उपायुक्त द्वारा लंबित दाखिल-खारिज एवं भूमि सीमांकन, लंबित प्रमाण पत्र मामलों, भारत सरकार एवं झारखण्ड सरकार के विभिन्न एजेंसियों को भूमि हस्तांतरण के संबंध में अद्यतन स्थिति, अवैध जमाबंदी, विभिन्न एजेंसियों को जंगल झार भूमि से संबंधित अनापत्ति एवं एफआरए एवं विभिन्न स्तर के राजस्व पदाधिकारियों के न्यायालयों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। बैठक के दौरान उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा द्वारा लगान निर्धारण, लगान वसूली और लैंड डिमार्केशन, सक्सेशन पार्टिशन म्यूटेशन आदि की अंचलवार समीक्षा की गयी। डिमार्केशन कार्य में तेजी लाने के लिए उपायुक्त ने अपर समाहर्त्ता को अमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निदेश दिये। म्यूटेशन के मामलों की समीक्षा के करते हुए उपायुक्त ने कहा कि सभी अंचल अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि 30 दिनों से लंबित मामले डबल डिजिट में न हो। जिले में जितने भी नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट चल रहे हैं उन सभी में भू-अर्जन की वर्तमान स्थिति क्या है, कितने गांव, मौजा में मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया चल रही है, कहां लंबित है, इसकी समीक्षा भी उपायुक्त द्वारा की गयी। उपायुक्त ने जिन मौजा में भुगतान नहीं हुआ है, वहां कैंप मोड में सभी लाभार्थियों के आवेदन, संबंधित दस्तावेज कलेक्ट करने के आदेश दिये। उपायुक्त ने कहा कि कैंप में बड़ी संख्या में आनेवाले आवेदन का त्वरित निपटारा संभव हो पाता है। उपायुक्त ने बताया कि प्रमुख रुप से पलमा-गुमला सेक्शन में 132 करोड़ के भुगतान के लिए समय सीमा तय की गई है। आने वाले 2 महीनों में पूरा भुगतान सफलतापूर्वक संपादित करा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतमाला प्रोजेक्ट, कांटा टोली फ्लाईओवर, बीजू पाड़ा कचहरी सेक्शन इन सभी में भी मुआवजा भुगतान की कार्यवाही वर्तमान में प्रगति पर है। आने वाले दिनों में कैंप मोड में लाभुकों के डिटेल्स लेकर लाभार्थियों को पेमेंट करा कर एनएचएआई को सुपुर्द करा दिया जाएगा ताकि वह सभी कांट्रेक्टर के माध्यम से सड़क का निर्माण पूरा करा दें। भारत सरकार तथा राज्य सरकार के विभिन्न विभाग को भूमि हस्तांतरण की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने समय सीमा के भीतर जमीन उपलब्ध कराने के निदेश संबंधित पदाधिकारियों का दिये। वर्तमान में जिले में 55 ऐसे मामले हैं। कहीं थाना बनाने, कहीं इग्नू को हॉस्टल बनाने, कहीं स्वास्थ्य विभाग को जमीन की आवश्यकता है। उपायुक्त ने कहा कि हर एक अंचल में जमीन को चिन्हित करा कर हस्तांतरित करवाने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है और तय समय सीमा में सभी विभागों को कंसर्न लोकेशन पर जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। आय, आवासीय जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राइट टू सर्विस एक्ट के तहत निर्धारित समय सीमा के अंदर आवेदक को प्रमाण पत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उपायुक्त ने कहा कि इसके लिए प्रज्ञा केंद्र को भी अलर्ट कर दिया गया है कि कोई भी अभ्यर्थी आवेदन करता हैं तो उन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के जितने भी विद्यार्थी अध्ययनरत हैं उनका स्कूल के समय में ही जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके लिए बड़ी संख्या में प्रज्ञा केंद्र के पास आवेदन आने शुरू हो गए हैं, इसके लिए सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द उनके प्रमाण पत्र निर्गत करें। बैठक के दौरान उपायुक्त श्री राहुल कुमार सिन्हा ने कहा कि सभी अंचल नियमित रूप से अपने कोर्ट की कार्यवाही करें। सारे कॉउज लिस्ट और आॅर्डर को आॅनलाइन अपलोड करें और नियमित रूप से अपने अपने कोर्ट के दिन अपने आॅफिस में उपलब्ध रहकर कोर्ट की कार्यवाही संपादित करें। उपायुक्त ने बैठक के दौरान भारत सरकार के विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों से कहा कि जिन्हें भी जमीन ट्रांसफर हो गयी है या एक्वायर कर उपलब्ध करा दी गयी ह,ै उसका अनिवार्य रूप से म्यूटेशन एप्लीकेशन संबंधित अंचल में दें ताकि जो रैयत अभी भी लगान निर्गत करा रहे हैं वो न हो और जमीन की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित रहे। उपायुक्त ने कहा कि कई बार ऐसे उदाहरण देखे गए हैं कि आम जनता ने किसी रैयत से जमीन खरीद ली और वह जमीन पहले ही किसी प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित कर ली गई थी और संबंधित एजेंसी ने उस पर काम शुरू नहीं किया था और म्यूटेशन भी नहीं कराया था तो रिकॉर्ड आॅफ राइट्स में नए एजेंसी का नाम नहीं आया और इसी गलतफहमी का नाजायज फायदा उठा कर कुछ लोग लोगों को बेवकूफ बनाते हैं और इस प्रकार की रजिस्ट्री हो जाती है। बहुत जरूरी है कि जिन एजेंसी ने सरकार के माध्यम से जमीन अधिग्रहित कराया है या सरकारी जमीन का हस्तांतरण प्राप्त किया है वह अपने-अपने रिकॉर्ड आफ राइट में इंट्री करा कर उसका म्यूटेशन प्राप्त कर लें।

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