त्वरित टिप्पणी (एबीएन न्यूज 24 डॉट कॉम के लिए बासुकीनाथ पाण्डेय)। सचमुच बिहार बिहार में बहार है। राज्य की राजनीति कब- किधर पलट जायेगी, ये अनुमान लगाना मुश्किल होता है। खासकर पिछले कुछ वर्षों की तो बात ही अलग है। बिहार की राजनीति के मुख्य धुरी नीतिश कुमार ने एक बार फिर पलटवार कर दिया है। भाजपा से तनातनी के बीच उन्होंने राजद के महागठबंधन के साथ जाने का निर्णय ले लिया है। सात बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे नीतिश ने एक बार फिर राजनीतिक चतुराई दिखाते हुए भाजपा को ही ‘आॅपरेशन सत्ता’ में परास्त कर दिया है। महाराष्टÑ और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी क्षेत्रीय दलों को तोड़ रही थी, वही फार्मूला बिहार में भी चर्चा में था। लेकिन यहां तो उलटा हो गया। बिहार में भाजपा पूरी ताकत से नीतिश कुमार को नकार रही थी। विधानसभा चुनाव हो या लोक सभा की बात तल्खी बढ़ती गयी। विधानसभा चुनाव में चिराग फैक्टर ने इस बात को हवा दी कि लोजपा को भाजपा ने ही नीतिश को कमजोर करने के लिये बढ़ावा दिया। वहीं लोकसभा चुनाव के बाद मात्र एक मंत्री पद देकर भी भाजपा ने एक गहरी चाल चल दी। जिस आजादी के लिये नीतिश कुमार ने राजद का साथ छोड़ दिया था, वह कठिनाई फिर से भाजपा की ओर से सामने आ रही थी। पूरे देश में क्षेत्रीय दलों को समाप्त करने की बात पटना में कहकर भाजपा ने जले पर नमक छिड़क दिया। वैसे भी जिन स्थितियों में नीतिश कुमार राजद से अलग हुए थे, वह स्पष्ट नहीं था। लेकिन खनिज विभाग में भ्रष्टाचार की चर्चा हुई थी। अब यह विषय नीतिश के अभिमान से छोटा पड़ गया। अगर वे और अधिक दिनों तक भाजपा के साथ रहते, तो निश्चिय ही उनका कुनबा समाप्त हो सकता था। साथ ही जदयू में भाजपा ने तोड़-फोड़ के प्रयास शुरू किये थे, जिसकी सूचना सार्वजनिक होने की बात भी कही जा रही है। लेकिन 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की जेपी नड्डा की घोषणा और अमित शाह की क्षेत्रीय पार्टियों को समाप्त करने की बात ने नीतिश को पलटवार करने के लिये मजबूर कर दिया और अब बिहार में सशक्त महागठवंधन की सरकार बनने जा रही है। (एडिटर एबीएनन्यूज24 डॉट कॉम)
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