राजस्थान : सवाईमाधोपुर में औसत से 11 और भरतपुर में 1% कम बारिश

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजस्थान में इस साल मानसून की बारिश ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मरुधरा में इस बार जुलाई के महीने में पिछले 66 बरसों के बाद सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। श्रीगंगानगर तो में एक ही महीने में पूरे सीजन से भी ज्यादा बारिश हो चुकी है। राजस्थान के दो जिलों में अभी भी औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। तय समय से कुछ देरी से राजस्थान में एंट्री करने वाले मानसून ने झमाझम बारिश से पूरे प्रदेश को तर-बतर कर दिया है। मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक साल 1956 के बाद जुलाई के महीने में इस बार राजस्थान में रिकॉर्डतोड़ बारिश दर्ज की गई है। 66 बरस पहले 1956 में राजस्थान में प्रदेश में 308 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद इस बार जुलाई माह में 270 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। राजस्थान में जुलाई माह में औसत बारिश का आंकड़ा 161।4 मिलीमीटर है। लेकिन इस बार 67 फीसदी ज्यादा यानि 270 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। शर्मा ने बताया कि 1956 से पहले 1908 में राजस्थान में 288 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। श्रीगंगानगर में पूरे मानसून सीजन से भी ज्यादा बारिश हो चुकी है : इस बार राजस्थान में जुलाई के महीने में सवाईमाधोपुर और भरतपुर को छोड़कर शेष सभी जिलों में औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। सवाईमाधोपुर में औसत से 11 और भरतपुर में एक फीसदी कम बारिश हुई है। राजस्थान में जुलाई के महीने में इस बार सबसे ज्यादा 513 मिलीमीटर बारिश कोटा जिले में दर्ज की गई है। लेकिन प्रतिशत के हिसाब से देखें तो श्रीगंगानगर में सिर्फ जुलाई के माह में ही औसत से 235 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह श्रीगंगानगर में पूरे मानसून सीजन से भी ज्यादा है। इसके अलावा बीकानेर में सामान्य से 151 फीसदी, चूरू में 116, जैसलमेर में 169 और जोधपुर में 140 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। मानसून की धमाकेदार परफोर्मेंस देखकर विशेषज्ञ भी हैरान : जुलाई के महीने में मानसून की धमाकेदार परफोर्मेंस देखकर विशेषज्ञ भी हैरान हैं। सिर्फ दो जिले सवाईमाधोपुर और भरतपुर ही ऐसे हैं जो जुलाई के महीने में सामान्य बारिश के आंकड़े के नहीं छू पाए हैं। लेकिन अभी मानसून की सीजन बाकी है और अगले दो तीन दिनों में प्रदेश में फिर से बारिश का दौर शुरू होने की संभावना हैं। इस बार का रिकॉर्ड देखते हुये उम्मीद जताई जा रही है कि आगे भी सभी रिकॉर्ड धराशाही हो जायेंगे।

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