टीम एबीएन, रांची। पुरानी पेंशन योजना के लिए एसओपी बनाने के लिए राज्य सरकार ने विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी मे विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह के साथ वित्त विभाग के प्रधान सचिव और कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव बतौर सदस्य होंगे। पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन भुगतान के लिए बनने वाले स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार होने के बाद मंत्रिपरिषद की मंजूरी ली जाएगी। राज्य सरकार द्वारा एसओपी तैयार किए जाने के बाद हर एक कर्मचारी को शपथ पत्र देकर इसे स्वीकार करने की सहमति देनी होगी। शपथ पत्र में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना को स्वीकार करने के अलावा भविष्य में किसी तरह का वित्तीय दावा नहीं करने की घोषणा करनी होगी। इसके लिए वित्त विभाग एक फॉर्मेट जारी करेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में 15 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में कुछ शर्तों के साथ पुरानी पेंशन स्कीम को मंजूरी दी गई थी। शर्त के अनुसार वित्त विभाग को कर्मचारियों के पीएफआरडीएल या एनएसडीएल के पास जमा राशि प्राप्त करने निमित्त हरसंभव प्रयास करने को कहा गया है। राज्य में अभी करीब 1.95 लाख स्थाई अधिकारी-कर्मचारी हैं। इनमें से 1.25 लाख नई पेंशन योजना के दायरे में हैं, जो 2004 में अंशदायी पेंशन योजना लागू होने के बाद बहाल हुए हैं। नई पेंशन योजना के तहत राज्य सरकार अभी एक हजार करोड़ वार्षिक अंशदान जमा करती है। नई पेंशन योजना में राज्य सरकार 14% और कर्मचारी 10% अंशदान देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद ब्याज सहित कुल जमा राशि का 40 से 60% हिस्सा कर्मचारी निकाल सकते हैं। पुरानी पेंशन योजना में सेवानिवृत्ति पर अंतिम मूल वेतन और महंगाई भत्ते की आधी राशि बतौर पेंशन जीवनभर राजकोष से मिलती है। इसके अलावा हर साल दो बार महंगाई भत्ता बढ़ता है। निधन होने पर पारिवारिक पेंशन की भी व्यवस्था है। यही वजह है कि कर्मचारी लगातार इसकी मांग कर रहे हैं।
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