एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। मीराबाई चानू ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। महिला वेटलिफ्टर मीराबाई 49 किग्रा वेट कैटेगरी में 201 किग्रा वजन उठाकर पहले स्थान पर रहीं। स्नैच में 88 और क्लीन एंड जर्क में 113 किग्रा का वजन उठाया। उन्होंने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट में भी वे पहले नंबर पर रही थीं। इसके अलावा 2020 टोक्यो ओलंपिक में 27 साल की इस एथलीट ने सिल्वर मेडल जीता था। मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स की बात करें, तो भारत को अब तक तीन मेडल मिले हैं और तीनों ही मेडल वेटलिफ्टर्स ने दिलाए हैं। इससे पहले पुरुष कैटेगरी में संकेत महादेव सरगर ने सिल्वर और गुरुराज पुजारी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। मीराबाई चानू ने छोटी सी उम्र में ही वेटलिफ्टिंग शुरू कर दी थी। वे 11 साल की उम्र में ही अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन। लेकिन ओलंपिक 2016 ने उनके करियर पर जैसे रोक ही लगा दी। मीराबाई गेम्स की सिर्फ दूसरी खिलाड़ी थीं, जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था "डिड नॉट फिनिश"। वे अपने इवेंट को पूरा नहीं कर सकी थी। इस कारण वे अपने खेल में काफी पीछे हो गई थीं। इसने उनके मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया था। इसके बाद वे डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें मनोचिकित्सक की मदद तक लेनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने खेल से अलविदा लेने तक मन बना लिया था। लेकिन शायद उनके खेल करियर को दूसरी ओर जाना था।
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