टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कम बारिश का सितम जारी है। 28 जुलाई तक राज्य में औसत से 58 प्रतिशत कम बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। वहीं राज्यभर में 15 प्रतिशत से कम धान की रोपनी हो पाई है। राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने झारखंड मंत्रालय में इसका खुलासा किया। कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में भी इसको लेकर चर्चा हुई है। बहुत जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इसकी समीक्षा होगी। सुखाड़ को लेकर केंद्र सरकार ने जो मानक तय किया है उस मानक के अनुरूप झारखंड के वर्तमान हालात है। संभावित सुखाड़ को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने 21 जुलाई से झारखंड राज्य फसल राहत योजना की शुरुआत कर दी है। अब तक 8 हजार 600 किसानों ने इसके तहत अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया है। विभाग ने 3 हजार और 4 हजार रुपया प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को मुआवजा देने का निर्णय लिया है। अब तक विभाग को मिली जानकारी के अनुसार चाईबासा जिले के कुछ हिस्से को छोड़ दे तो पूरे राज्य की एक जैसी स्थिति है। झारखंड में 2019 में सुखाड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला था। झारखंड में प्रखंड स्तर पर सुखाड़ का आकलन किया जाता है। इस बार भी विभाग प्रखंड स्तर पर ताजा हालात को अपडेट करने में लगी है। हालांकि विभाग को अभी भी अगले 10 दिन में होने वाली बारिश का इंतजार है।
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