बच्चों के प्रति लगाव रखें ग्रैंड पेरेंट्स और अपने अनुभवों को साझा करें : आयुक्त

 

टीम एबीएन, पलामू/रांची। दादा-दादी, नाना-नानी ( ग्रैंड पैरेंट्स) बच्चों के प्रति लगाव रखें। ग्रैंड पेरेंट्स के पास जो अनुभव है, वह शायद बच्चों के माता-पिता के पास भी नहीं है। इनका अनुभव बच्चों को मिलना काफी महत्व रखता है। यह बच्चों के लिए लाभदायक होगा। ग्रैंड पेरेंट्स बच्चों के प्रति लगाव रखें और अपने अनुभव इन बच्चों के बीच साझा करें। बच्चे संस्कारयुक्त शिक्षा ग्रहण कर बेहतर प्रदर्शन करें और जीवन में नए मुकाम हासिल कर समाज में नाम रौशन करें। यह बातें आयुक्त डॉ. जटा शंकर चौधरी ने कही। वे ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, शाहपुर में गुरुवार की शाम आयोजित दीक्षांत समारोह-सह- दादा-दादी सम्मान समारोह एवं तरंग पत्रिका के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। आयुक्त ने ग्रैंड पैरंट्स के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एकल परिवार होता जा रहा है। ऐसे में ग्रैंड पेरेंट्स के सम्मान में थोड़ी कमी आ रही है, जबकि पहले ऐसा नहीं था। समाज परिवार के बीच जुड़ा होता था। इसपर चिंतन करने की जरूरत है। स्कूल प्रबंधन ने ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को ग्रैंड पेरेंट्स से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ग्रैंड पेरेंट्स को एहसास दिलायेगा कि बच्चों के बेहतर प्रदर्शन के चलते ही वे स्कूल तक पहुंचे हैं। आयुक्त ने बच्चों की प्रतिभा को निखारने की बातें कही। साथ ही बच्चों को जीवन में नए कीर्तिमान स्थापित करने की प्रेरणा दी। स्कूल के प्रचार्य डॉ एके सिंह ने कहा कि दादा-दादी एवं नाना-नानी के गुणों का समावेश बच्चों में होता है। ये बच्चों को घर में अनुशासन, शिष्टाचार के साथ-साथ अच्छे संस्कार की शिक्षा देते हैं। बच्चे दादा-दादी से ही नैतिक शिक्षा का ज्ञान प्राप्त करते हैं। अपने आसपास की अच्छाई-बुराई एवं मनुष्यता से परिचय कराते हैं तथा बच्चों को चरित्रवान एवं आदर्श मनुष्य बनाते हैं। उन्होंने आजीवन दादा-दादी, नाना-नानी की सेवा करने के लिए बच्चों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ दो पीढ़ियों को जोड़ता है। दादा-दादी, नाना-नानी के अनुभव तथा नजरिया बच्चों को जीवन की हर परिस्थितियों से जूझने की शक्ति देता है। तरंग पत्रिका के संबंध में उन्होंने बताया कि यह पुस्तक बच्चों में रचनाशीलता, विवेकशीलता, कल्पनाशीलता, भविष्य के प्रति सजगता एवं उत्साहित जीवन जीने एवं प्रगति पथ पर चलते रहने को प्रेरित करेगी। यह पुस्तक भविष्य में बच्चों के उज्जवल साहित्य निर्माण में सहायक होकर आगे भी निरंतर लेखन हेतु प्रेरित करेगी। कार्यक्रम में बच्चों ने मनमोहक गीत तथा नृत्य से समा बांधा। बच्चों की एक-से-बढ़कर एक प्रस्तुति को सभी ने सराहना की। इधर, छोटे-छोटे बच्चों को जब गाउन पहनाकर प्रमाण पत्र एवं पदक के लिए मंच पर उतारा गया, तो उनका उत्साह देखते बन रहा था। कक्षा 1 में जाने वाले 91% एवं अधिक अंक लाने वाले 92 बच्चों को स्वर्ण पदक एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं उनके ग्रैंड पैरेंट्स को बैच देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन शिवांगी आनंद एवं मीनू सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रज्ञा आनंद ने किया। मौके पर शिक्षिका प्रज्ञा आनंद, ममता कुमारी, शिक्षक भरत लाल वर्मा, नंदुलाल, नवेन्दु एवं स्कूल के बच्चे, उनके अभिभावक, दादा-दादी, नाना-नानी सहित स्कूल के अन्य शिक्षक, शिक्षिकाएं उपस्थित थे।

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