नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिनंदन...

 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (शिवशंकर उरांव)। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने कीर्तिमान रच दिया। देश की प्रथम आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाकर देश के 13 करोड़ आदिवासियों के सम्मान में एक लंबी लकीर खींच दी। एक ऐसी लकीर जो आजाद भारत में कभी मिट नहीं सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जिस प्रकार देश की अंतरात्मा की आवाज को सुनकर समाज के हर तबके को सम्मान और इज्जत दिया है वह आजाद भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। आनेवाली पीढ़ी इस निर्णय पर गर्व करेगी और वर्तमान इस गर्व के पल को शब्दों में बयां नहीं कर सकता है। माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एक सामान्य परिवार का सदस्य होना, मयूरभंज जैसे छोटे से स्थान से राजनीति में संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना और फिर झारखंड के राज्यपाल के रूप में इस गरिमामयी पद का सम्मान बढ़ाना आज मुझे गौरवान्वित कर रहा है। माननीया जब झारखंड की राज्यपाल के पद को सुशोभित कर रही थीं तब भी उन्होंने आदिवासियों के हित में राज्य सरकार के कार्य पर पैनी नजर रखी थी। मैं कई बार उनसे मिला, लेकिन मुझे आज भी वह कार्यशाला याद है जिसमें सुबह 10 बजे से लेकर शाम तक राज्य में सीएम से लेकर सभी विधायक, उच्च अधिकारी और जनजातीय हित से जुड़े जनों के साथ उन्होंने गहन मंथन किया था। यह मंथन आदिवासियों के हित में चलाये जा रही योजनाओं की समीक्षा मात्र नहीं थी। उनकी गंभीरता इतनी अधिक थी कि मैं आश्चर्यचकित रह गया। मेरे जीवन में यह कार्यक्रम और माननीया का हर एक बिंदु पर गहन चिंतन और समझ ने मुझे यह समझने को मजबूर कर दिया कि वे अपने समाज और राष्ट्रहित को लेकर कितनी सजग हैं। आदिवासियों के सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक स्थिति, आर्थिक संभावना, केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं में आदिवासियों का हित और उन योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को लेकर उन्होंने राज्य के शीर्ष स्तर पर मैराथन विमर्श किया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि समाज के यह वर्ग जो आजादी के बाद उपेक्षा और पिछड़ापन का शिकार था वह अब मूल घारा में आ रहा है और इसके लिये जिन लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक संरचना, सामाजिक विकास की आवश्यकता होगी उसे राज्य और केंद्र की सरकार मिलकर लागू करें। कई बार उनसे मिलने के बाद यह एहसास हुआ कि राजनैतिक मूल्यों के साथ उनकी सामाजिक चेतना बहुत उच्च स्तर की थी। झारखंड देश का खनिज बहुल संपन्न राज्य है लेकिन लंबी उपेक्षा के कारण यहां के ग्रामीण परिवेश में रचे बसे आदिवासियों के हित में ठोस काम की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी की सरकार के काल में ही हुई। आज केन्द्र की मोदी सरकार ने राज्य के उपेक्षित जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, स्वच्छ जल, विधि व्यवस्था को लेकर जो गंभीरता दिखायी है उसका ही एक दूसरा फलक है माननीय द्रोपद्री मुर्मू का राष्ट्रपति पद के लिये चुना जाना। पूरे देश में आदिवासी आबादी अपने विकास के लिये मोदी सरकार की ओर निगाहें कर रखी है। ऐसे में सर्वोच्च पद पर अगर समाज की महिला जिनके अनुभव का लाभ ओड़िसा और झारखंड को मिल चुका है अब देश को मिलें तो पूरे आदिवासी समुदाय में एक सकरात्मक संदेश जाता है। सामाजिक अभिशाप कहें या विपदा कि जिस दिल्ली में हमारी आदिवासी बेटिÞयों को पलायन के बाद विभिन्न कल कारखानों में कठिनाई भरी जिंदगी जीते हुए कार्य करने के लिये जाना होता है उसी दिल्ली में देश के सर्वोच्च पद अपने समाज की बेटी को पाकर निश्चित तौर पर उन्हें एक मानसिक, सामाजिक गर्व का एहसास होगा ही। कोई भी समाज अपने आप पर गर्व करके ही राष्ट्र के विकास का हिस्सा बनता है। वैसे तो आदिवासी पूरी दुनिया में हैं लेकिन देश में भारत में आदिवासियों को प्राय: ‘जनजातीय लोग’ के रूप में जाना जाता है। आदिवासी मुख्य रूप से भारतीय राज्यों उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि में बहुसंख्यक व गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में भी है जबकि भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों में यह बहुसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम। भारत सरकार ने इन्हें भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित जनजातियों के रूप में मान्यता दी है। आदिवासीय समुदाय आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक बिरसा मुंडा सहित दर्जनों वीर के साथ हर सामाजिक आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता रहा है। आज पूरा समाज राष्ट्रीयता की चेतना से ओत प्रोत है और यह संभव हुआ है पीएम मोदी, हमारे अध्यक्ष जेपी नड्डा और वरिष्ठ जनों के दूरदर्शी और सजग नेतृत्व के निर्णय से। देश का हर आदिवासी परिवार आज अपने समाज को सम्मानित महसूस करते हुए खुशियां मना रहा है। यह निर्णय राष्ट्र बोध का निर्णय है जिसे लेने की हिम्मत और इच्छा शक्ति वर्तमान सरकार में ही है। हम भारतीय जनता पार्टी के कार्यकत्ता के रुप में तो गौरवान्वित हैं ही हमार वैश्विक मंच पर भी यह संदेश गया है कि देश में आदिवासी समुदाय का महत्व वर्तमान समय में कितना अधिक है। ओछी राजनीति और भाषणबाजी से हटकर माननीय प्रधानमंत्री मोदी ने जो कार्य किया है वह कीर्तिमान अमिट हो गया है। कोटिश: ह्दय उन्हें धन्यवाद कर रहा है। समाज के हर वर्ग को यह संदेश गया है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा योग्य जनों के लिये भारतीय जनता पार्टी उसकी योग्यता और समाजिक समरसता को लेकर सजग है। सबका साथ, सबका विश्वास, सबका प्रयास और शासन निस्वार्थ, राष्ट्र हित सर्वोपरि। देश के सभी सांसदों, विधायकों को विशेषकर जिन्होंने इस कीर्तिमान के लिये पार्टी लाइन से हटकर भी माननीय द्रोपद्री मुर्मू जी को वोट किया उन्हें झारखंड, पूरे देश के सभी आदिवासियों की ओर से साधुवाद, धन्यवाद देते हुए अभिनंदन करता हूं। इस गौरव के क्षण को जीने का आह्वान करता हूं। देश के 15वें राष्ट्रपति को हमारा अभिनंदन। (लेखक झारखंड एसटी मोर्चा के अध्यक्ष हैं।)

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