एबीएन सेंट्रल डेस्क। द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति होंगीं। वह आजाद भारत की दूसरी महिला और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी। 25 जुलाई को द्रौपदी मुर्मू देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। 24 जुलाई को वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कौन हैं द्रौपदी मुर्मू : द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है। वह संथाल परिवार, एक आदिवासी जातीय समूह से ताल्लुक रखती हैं। वह भारतीय जनता पार्टी की सदस्य हैं। 2006 से 2009 तक एसटी मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रहीं। 2004 से 2009 तक रायरंगपुर विधानसभा की सदस्य रहीं। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान वह 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार और 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं। बता दें कि द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक के रूप में काम किया है। वह पार्षद और फिर विधायक बनीं। सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तरह द्रौपदी मुर्मू लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हैं और लंबे समय तक विधायक और मंत्री रही हैं। उन्होंने ओडिशा सरकार के परिवहन और वाणिज्य विभागों को संभाला है। और 2007 में विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार जीता है। मुर्मू 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल भी रहीं।
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