टीम एबीएन, रांची। मानसून की बेरुखी से राज्य में किसानों पर आफत आ गयी है। पूरे झारखंड राज्य में कम बारिश से धान की खेती का लक्ष्य जहां बमुश्किल 5 प्रतिशत ही पूरा हो सका है, खरीफ की अन्य फसलों की स्थिति भी खराब है। हालत यह है कि खरीफ की खेती योग्य राज्य के 90 प्रतिशत खेत खाली पड़े हैं। आंकड़ों की बात करें तो राज्य में इस वर्ष 28.27460 लाख हेक्टेयर में खरीफ की खेती का लक्ष्य था, जिसमें से महज 10.13 प्रतिशत, यानी 2.86570 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसलें लग पाई है। इसमें धान की खेती का हाल सबसे खराब है। राज्य में इस साल 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य था, जिसके विरुद्ध अब तक 96.547 हजार (5 प्रतिशत) हेक्टेयर में धान की खेती की जा सकी है। कम बारिश के कारण हो रही समस्या को देखते हुए राज्य सरकार के कृषि विभाग ने छोटी अवधि के धान लगाने, ड्रॉट टॉलरेंस वेराईटी के साथ मलचिंग व इंटरक्रॉपिंग तकनीक अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। पलामू के नीलांबर-पीतांबर प्रखंड के जुरू गांव में बारिश के अभाव में सूख रहा धान का बिचड़ा। साहेबगंज, गोड्डा, गुमला में स्थिति ज्यादा खराब : कृषि निदेशक निशा उरांव ने बताया कि राज्य में पिछले खरीफ मौसम की तुलना में इस बार काफी कम बारिश हुई है। इनमें साहेबगंज, गोड्डा, गुमला आदि की स्थिति काफी खराब है। पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम की हालत भी अच्छी नहीं है। इस साल अब तक 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है। छह जिले रांची, धनबाद, बोकारो, दुमका, सरायकेला व गिरिडीह में 30 से 49 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं शेष 16 जिलों में 51 से 79 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
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