कोरोना के बाद शेयर बाजार में 75 फीसदी नये ग्राहक युवा वर्ग के

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 ने आज देश और दुनिया में काम करने के तरीकों को बदल कर रख दिया है। महामारी के बाद से कई क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसा ही एक अहम परिवर्तन शेयर बाजार में भी देखा गया है। आज नई पीढ़ी के युवा निवेशक उत्साह के साथ इस बाजार में कदम रख रहे हैं। वे अपने स्मार्टफोन के जरिए शेयर ट्रेडिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, नकदी बाजार के टर्नओवर में मोबाइल फोन के जरिए होने वाला कारोबार जून 2019 के 5.3 फीसदी के मुकाबले जून 2022 में बढ़कर 18.7 फीसदी पर पहुंच गया। जबकि एनएसई पर मोबाइल ट्रेडिंग की हिस्सेदारी जून 2022 में 19.5 फीसदी रही है। हालिया एनएसई की रिपोर्ट में कहा गया है, देश में इंटरनेट आधारित ट्रेडिंग ने पहले के मुकाबले तेजी से रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2020 के बाद से लोगों का इसके प्रति ज्यादा रुझान देखा गया है। लॉकडाउन के बाद से खुदरा भागीदारी में इजाफे के कारण ऐसी ट्रेडिंग बढ़ी है। खुदरा निवेशकों और ट्रेडरों ने अपने घर से सीधे इक्विटी में ट्रेड के लिए आॅनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू किया है। इसमें ज्यादातर युवा निवेशक सक्रिय ट्रेडर बन रहे हैं। वे स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के जरिए इस बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। 70 से 75 फीसदी ग्राहक नई पीढ़ी के : अरिहंत कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के सीए अनीश जैन अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं कि आज ट्रेडिंग में 70 से 75 फीसदी ग्राहक नई पीढ़ी के हैं। वे सभी आॅनलाइन ट्रेडिंग ही कर रहे हैं। पहले के मुकाबले आज आसानी से खाता खुलना मोबाइल ट्रेडिंग में बढ़ोतरी में सबसे अहम माना गया है। आधार कार्ड ने भी डीमैट खाता बिना किसी परेशानी के खोलना की प्रक्रिया को आसान कर दिया है। पहले यही खाता खोलने में दो से तीन दिन लग जाते थे। आज जिस तरह की बढ़त हम देख रहे हैं, उसके लिए आधार के जरिए खाता खुलना एक उत्प्रेरक की तरह रहा है। इससे पहले ग्राहकों को खाता खोलने के लिए कम से कम 25 से 30 हस्ताक्षर आवेदन फॉर्म पर करने होते हैं और फॉर्म के साथ संलग्न किए जाने वाले सभी दस्तावेजों को स्वप्रमाणित करना होता है। आज आधार के जरिए खाता खोलने पर ये प्रक्रियाएं नहीं अपनानी पड़ती हैं। अब महज केवल आधे घंटे में खाता खुल जाता है। आॅनलाइन ट्रेडिंग से कर्मचारियों की संख्या घटी : शेयर बाजार कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि कोरोना महामारी के बाद बाजार में कई बदलाव देखने को मिले हैं। पहला, निवेशकों ने डिजिटल माध्यम को तेजी से अपनाया है। दूसरा, ब्रोकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों ने नई टेक्नोलॉजी में ज्यादा निवेश किया है। ऐसे में डीलरों के जरिए आने वाला वॉल्यूम मोबाइल की ओर शिफ्ट कर गया है। क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते डीलिंग रूम में कर्मचारियों की उपलब्धता बहुत सीमित हो गई है। आज टेक्नोलॉजी पर खर्च जरूर बढ़ा है। लेकिन कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन की बचत भी हुई है। इससे बाजार में पिछले 10 साल में कर्मचारियों की संख्या घटकर 10 फीसदी रह गई है। जबकि वॉल्यूम दोगुने से ज्यादा हो गया है। कंपनियां यह सब रिलेशनशिप मैनेजर के बड़े नेटवर्क के जरिए ही कर सकी है। क्योंकि आज सभी बड़ी कंपनियों के पास नई-नई तकनीकें हैं। इससे काम पहले की तुलना में बहुत आसान हो गया है। इससे पहले क्लाइंट ब्रोकर के कंप्यूटर टू कंप्यूटर लिंक सिस्टम का इस्तेमाल आॅर्डर के लिए करते थे। इसमें उन्हें डीलरों की मदद लेना होती थी। मोबाइल ट्रेडिंग से यह हो रहे फायदे : मोबाइल ने ट्रेडिंग की लागत काफी कम करने में मदद की है। क्योंकि इससे आॅर्डर के लिए किसी व्यक्ति पर आश्रित होने की अनिवार्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। चूंकि किसी व्यक्ति के लिए कार्य की एक सीमा होती है, ऐसे में जब ब्रोकरेज कर्मी के जरिए आॅर्डर दिए जाते हैं, तब गलत ट्रेड होने के चांसेंज काफी ज्यादा होते हैं। इसके अलावा चूंकि डीलर ट्रेड की सिफारिश करते हैं, ऐसे में क्लाइंटों को नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन अब ग्राहक खुद ही मोबाइल पर ट्रेड करते हैं।

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