अमरनाथ में जल तांडव : सुरक्षित जगह भेजे गये 15,000 श्रद्धालु, लापता 48 लोगों की तलाश

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ की पवित्र गुफा के पास बादल फटने के कारण अचानक आयी बाढ़ के चलते फंसे कम से कम 15,000 तीर्थयात्रियों को यहां निचले आधार शिविर पंजतरणी स्थानांतरित कर दिया गया है। आईटीबीपी के प्रवक्ता ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि आईटीबीपी ने पवित्र गुफा के निचले हिस्से से पंजतरणी तक जाने वाले मार्ग में लगे दलों की संख्या भी बढ़ा दी है। दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ के गुफा मंदिर के पास अचानक आई बाढ़ में शुक्रवार शाम को कम से कम 13 लोगों की जान चली गई और तंबू व सामुदायिक रसोई में पानी भर गया। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि 30 जून को शुरू हुई अमरनाथ यात्रा को इस त्रासदी के बाद स्थगित कर दिया गया है और बचाव अभियान खत्म होने के बाद इसे फिर से शुरू करने पर फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कल शाम आई बाढ़ के कारण पवित्र गुफा क्षेत्र के पास फंसे अधिकांश यात्रियों को पंजतरणी में स्थानांतरित कर दिया गया है। निकासी अभियान तड़के 3.38 बजे तक चला। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रवक्ता ने कहा कि रास्ते में कोई यात्री नहीं है। अब तक करीब 15,000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा चुका है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक प्रवक्ता ने कहा कि अर्धसैनिक बल के डॉक्टर और चिकित्सा कर्मियों ने बाढ़ में गंभीर रूप से घायल नौ मरीजों का इलाज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कम ऊंचाई वाले नीलग्राथ आधार शिविर पहुंचाया गया है। पवित्र गुफा से आने वाले तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए नीलग्राथ हेलीपैड पर बीएसएफ की एक छोटी टीम भी तैनात है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात पंजतरणी में बनाए गए बीएसएफ शिविर में करीब 150 यात्री रुके थे और शनिवार सुबह 15 मरीजों को हवाई मार्ग के जरिये बालटाल पहुंचाया गया।

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