एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला ने फिलहाल भारत आने की योजना टाल दी है। टेस्ला दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है और इसके सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे बड़े रईस हैं। मस्क चाहते थे कि टेस्ला को भारत में कार बेचने की अनुमति दी जाए और विदेश से मंगाई जाने वाली कारों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाए लेकिन भारत सरकार ने उसकी इस मांग को ठुकरा दिया था। फॉर्चून की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कारें बन रही हैं जो टेस्ला को धूल चटा सकती हैं। सोडियम आयन बैटरी बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी Faradion ने इसे ट्वीट किया था। महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इसी रिट्वीट करते हुए लिखा, आपके मुंह में घी शक्कर। भारत में टाटा और महिंद्रा सहित कई कंपनियां इलेक्ट्रिक कारें बना रही हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इलेक्ट्रिक कारों के लिए बड़ी योजना बनाई है। कंपनी को वित्त वर्ष 2027 तक दो लाख इलेक्ट्रिक कारें बेचने का भरोसा है। कंपनी ईवी बिजनेस पर एक अरब डॉलर से अधिक निवेश कर रही है। उसकी योजना अगले पांच साल में पांच इलेक्ट्रिक वीकल निकालने की है। कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 से उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 20 से 30 फीसदी होंगी। मस्क ने हाल में ट्वीट किया था कि टेस्ला किसी भी ऐसी जगह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाएगी जहां उसे पहले अपने कारों को बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। मस्क चाहते थे कि भारत सरकार टेस्ला को चीन से कारें आयात करने का लाइसेंस दे और इस कारों पर कोई इम्पोर्ट ड्यूटी न लगाई जाए लेकिन भारत सरकार ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों की नई जेनरेशन डेवलप हो रही है। ये गाड़ियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में टेस्ला की छुट्टी कर सकती हैं। इसकी वजह यह है कि भारत में आधुनिक तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रिक कारें बन रही है जबकि टेस्ला की तकनीक एक दशक पुरानी है।
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