टीम एबीएन, पटना। पिछले साल की तरह इस साल भी वैशाली जिले पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है जिसको लेकर गंडक नदी के किनारे रहनेवाले लोगो के रातों की नींद उड़ गई है। एक ओर जहां लोगों में बाढ़ के खतरे को लेकर बेचैनी है, तो वहीं जल संसाधन विभाग से लेकर जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ पूर्व तैयारी पूरी कर लिए जाने का दावा किया जा रहा है। नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र पोखरा, भैरवा और भरतपुर में लगातार हो रही बारिश का असर वैशाली में भी देखने को मिल रहा है। आलम यह है कि वाल्मीकिनगर गंडक बराज से दो दिन पहले छोड़े गए ढाई लाख कयूसेक से अधिक पानी के पहुंचने को लेकर जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने कटावरोधी कार्य तेज कर दिया है तो वहीं गंडक नदी के बहाव को फैलाने के लिए शोल कटिंग का काम भी युद्धस्तर पर किया जा रहा ताकि नदी की चौड़ाई बढ़े जिससे बांध पर दवाब कम बन सके। लालगंज प्रखंड के बलहा बसंता घाट पर सीएम के औचक निरीक्षण के बाद तिरहुत तटबंध पर विशेष निगरानी बरती जा रही है और जल संसाधन विभाग के साथ-साथ प्रशासन की टीम भी 24 घण्टे तैनात है। हालांकि, स्थानीय लोग कराए जा रहे काम को नाकाफी बता रहे हैं और चिंतित है कि अगर समय से पहले काम सही नहीं हुआ तो बड़ी तबाही मच सकती है। ग्रामीण सुबोध कुमार ने बताया कि पिछले साल भी इस घाट पर काम कराया गया था। लेकिन, पानी बढ़ने के साथ ही सारा काम धराशाई हो गया जिसके बाद यहां के लोग आक्रोशित हो गए थे जिसके कारण एक महीने तक यहां पुलिस की तैनाती की गई थी। सोल कटिंग का काम शुरू : वहीं बाढ़ नियंत्रण और जल नि:ससरन विभाग के सहायक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि नदी की धार यहां तेज रहती है और यहां नदी की चौड़ाई भी कम है। लिहाजा नाव के सहारे पोकलेन मशीन नदी की दूसरी तरह ले जाकर सोल कटिंग का काम शुरू किया गया है। ताकि नदी के बहाव को फैलाया जा सके जिससे कि बांध पर दबाव कम हो।
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