टीम एबीएन, कोडरमा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा गुजरात दंगों के पीड़ितों की मदद के लिए बनी संस्था सिटीजन फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ की गुजरात एटीएस द्वारा तथा पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार की डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तारी की तीखी निंदा की है तथा कहा है कि उनकी गिरफ्तारी के लिए जो दिन चुना गया है, उससे स्पष्ट है कि देश फासीवादी तानाशाही के शिकंजे में कसता जा रहा है। माकपा के झारखंड राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने गुजरात दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि तीस्ता सीतलवाड़ का अपराध केवल यही है कि वह दंगों की शिकार पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी रही है तथा संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है। सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों ने गुजरात दंगों के असली अपराधियों का पर्दाफाश किया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में मोदी सरकार बदले की भावना से काम करते हुए उनके इस साहस और दंगा पीड़ितों की मदद करने के नागरिक अधिकार को कुचलने की कोशिश कर रही है। गुजरात एटीएस और क्राइम ब्रांच के व्यवहार से एक बार फिर साफ हो गया है कि हमारे देश की संस्थाओं को अपने राजनैतिक मंसूबे पूरा करने के लिए भाजपा सरकार ने किस प्रकार अपना गुलाम बनाकर रख दिया है। सीपीएम नेता ने कहा है कि गुजरात दंगों के अपराधी पूरी न्याय व्यवस्था को चिढ़ाते हुए घूम रहे हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी आपराधिक चुप्पी साध ली है। उन्होंने तीस्ता और श्रीकुमार सहित सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताऒं पर लगाये गए फ़र्ज़ी मुकदमे वापस लेने तथा उनका उत्पीड़न बंद करने की मांग की है।
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