एबीएन नॉलेज डेस्क। सांप से लोग डरते तो बहुत हैं, लेकिन सांप के बारे में जानना पसंद करते हैं। ऐसे में आज हम आपको सांप के कान के बारे में बता रहे हैं। दरअसल, आपने सांप के आंख, मुंह, जीभ देखे होंगे, लेकिन कभी आपने सांप के कान देखे हैं? अब सवाल ये है कि अगर सांप के कान ही नहीं है तो उसे सुनाई कैसे देता है। तो जानते हैं सांप के सुनने की क्षमता और उससे जुड़े विज्ञान के बारे में... दरअसल, सांप के पास सुनने के लिए इंसानों और अन्य जानवरों की तरह अलग से कान नहीं होते हैं। लेकिन, उनके शरीर में अलग तरह का सिस्टम होता है, जिसेस वो किसी की आहट को भी सुन लेते हैं और उसके हिसाब से अपना बचाव कर लेते हैं। उनके आंतरिक कान होते हैं और इसलिए उन्हें बहरा नहीं कहा जा सकता है। अब सवाल है कि आखिर सांप के कान किस तरह से काम करते हैं। दरअसल, सांप के शरीर में एक छोटी सी हड्डी होती है, जो जबड़े की हड्डी को भीतरी कान की नली से जोड़ती है। ऐसे में सांप के कान का काम उनकी स्किन करती है और वो स्किन दिमाग को कमांड देती है। जैसे अन्य जीवों में कान में ईयर ड्रम होते हैं, वैसे सांप के कान में नहीं होते हैं। वहीं, जो प्रोसेस दूसरे लोगों के कानों में होता है, वैसे ही होता है। बस वे स्किन के जरिए कमांड अंदर देते हैं। बता दें कि सांपों के सुनने की क्षमता सीमित होती है। उनके शरीर में एक छोटी सी हड्डी होती है। सांप केवल 200 से 300 हर्ट्ज की ध्वनि सुन सकते हैं।
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