बिच्छू का जहर जानलेवा और प्राणदाता दोनों, जानें कैसे...

 

एबीएन नॉलेज डेस्क। वैज्ञानिक कहते है, बिच्छू धरती का ऐसा सबसे पुराना जीव है जो आज भी जिंदा है। इसके जीवश्म बताते हैं कि यह डायनासोर से भी ज्यादा पुराना जीव है। सिर्फ यही नहीं, बिच्छू से जुड़ी ऐसी कई दिलचस्प बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। जैसे- बिच्छू की कई प्रजाति ऐसी हैं जो बिना किसी भोजन के एक साल तक जिंदा हर सकती हैं। बिच्छू का जहर (काफी जहरीला माना जाता है, लेकिन फिर भी ये इंसानों की जान बचाता है, जानिए कैसे... बिच्छू का जहर कितना जहरीला है, पहले इसे समझ लेते हैं। मेयो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अपनी पूंछ में लगे डंक से जहर छोड़ता है। एक बार इसके डंक मारने पर शरीर में जहर तेजी से फैलता है। इसका जहर सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम यानी मस्तिष्क पर असर छोड़ता है। इसलिए असर भी तेजी से दिखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके जहर का असर सबसे ज्यादा दो तरह के लोगों में होता है। पहला बच्चों में और दूसरा बुजुर्गों में। डंक मारने के कुछ ही घंटों के अंदर हार्ट फेल और सांस न ले पाने के मामले सामने आते हैं। यही मौत की सबसे बड़ी वजह बनती है। अमेरिका में ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं। ये तो हुई जान लेने की बात, अब समझते हैं इसका जहर लोगों की जान कैसे बचाता है। इसके जहर में ऐसे केमिकल भी पाए जाते हैं जिनका इस्तेमाल दवा की तरह किया जाता है। जैसे-क्लोरोटॉक्सिन। इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में किया जाता है। एशिया में बिच्छुओं की कुछ ऐसी प्रजातियां भी पाई जाती हैं जिसमें एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स होते हैं, ये बैक्टीरिया के संक्रमण को घटाने में असरदार साबित होते हैं। एशियाई बिच्छुओं के जहर में एंटी-इंफ्लेमेट्री खूबी होती हैं जो आर्थराइटिस के इलाज में काम आता है। इसके अलावा आॅटोइम्यून डिसआॅर्डर में भी असर दिखाता है। इस तरह बिच्छू का जहर सिर्फ जान लेता ही नहीं, जीवन भी देता है।

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