एबीएन डेस्क, रांची। पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे उड़न सिख मिल्खा सिंह शनिवार को अपनी अनंत यात्रा पर रवाना हो गये। जीवन में हर कठिनाई को पार कर मिल्खा सिंह ने वो पहचान बनाई कि दुनिया उनकी मुरीद बन गयी। कोरोना जैसी नामुराद बीमारी ने उनका जीवन बेशक छीन लिया, लेकिन वे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। चंडीगढ़ में शनिवार शाम जब उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई तो पूरा चंडीगढ़ अपने हीरो को सलामी देने उमड़ पड़ा। शाम लगभग साढ़े पांच बजे पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह की फोटो को सीने से लगाकर मिल्खा सिंह पंचतत्व में विलीन हो गये। इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीके सिंह बदनौर सेक्टर 25 के श्मशान घाट पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। मिल्खा सिंह के अंतिम दर्शन करने पहुंचे पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह सेक्टर-8 स्थित मिल्खा सिंह के आवास पर करीब 5 मिनट बैठे। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने एक दिन के राजकीय शोक और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी पटियाला में मिल्खा सिंह के नाम पर एक चेयर स्थापित करने का एलान किया। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता महान धावक मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके निवास स्थल पर पहुंचे थे। शाम चार बजे मिल्खा सिंह के पार्थिव शरीर को फूलों से सजी गाड़ी में रखा गया था। इससे पहले पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल अपने परिवार के साथ मिल्खा सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह पूरे पंजाब और देश के लिए दुख की घड़ी है। बादल ने कहा कि वह यही कामना करते हैं कि देश की हर मां मिल्खा सिंह जैसे पुत्र को जन्म दे।
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